भोपाल। भारतीय रेलवे के लोको पायलट केवल ट्रेनें चलाने वाले चालक नहीं, बल्कि पूरे रेल परिचालन की रीढ़ माने जाते हैं। यात्रियों और माल ढुलाई की समयबद्ध, सुरक्षित और निर्बाध सुविधा सुनिश्चित करने में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। भोपाल रेल मंडल और पश्चिम मध्य रेलवे ने लोको पायलटों की कार्य स्थितियों को बेहतर बनाने की दिशा में बीते वर्षों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जो न केवल तकनीकी उन्नयन से जुड़े हैं, बल्कि कर्मचारी कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य को भी केंद्र में रखते हैं।
562 लोकोमोटिव्स में एयर कंडीशनिंग, गर्मी में राहत और काम में कुशलता
वर्ष 2024-25 में पश्चिम मध्य रेलवे द्वारा 27 अतिरिक्त लोकोमोटिव्स में एयर कंडीशनिंग सुविधा जोड़ी गई, जिससे अब तक कुल 562 लोको वातानुकूलित हो चुके हैं। भोपाल मंडल की यह पहल न केवल गर्म मौसम में ड्राइवरों को राहत देती है, बल्कि लंबे समय तक एकाग्रता बनाए रखने में भी मददगार साबित हो रही है।
858 लोको केबिन्स को “क्रू फ्रेंडली” बनाया जा रहा है
लोको पायलटों के बैठने और काम करने की जगह को एर्गोनोमिक डिज़ाइन और तकनीकी सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। कुल 858 लोको केबिन्स को क्रू फ्रेंडली बनाने की दिशा में कार्य चल रहा है, जिससे लोको पायलटों को बेहतर विज़न, आरामदायक सीट और आसान संचालन का अनुभव मिल सके।
सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण और मेंटल हेल्थ सपोर्ट
टेक्नोलॉजी आधारित ट्रेनिंग के अंतर्गत सिम्युलेटर सिस्टम को प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया है, जिससे लोको पायलटों की प्रतिक्रिया क्षमता और सतर्कता को मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ-साथ परिवार संवाद शिविर, सेफ्टी सेमिनार और परामर्श सत्रों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य और कार्य संतुलन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
नए इंजन में शौचालय अनिवार्य, पुराने इंजन में रेट्रोफिटिंग जारी
लोको पायलटों की मूलभूत जरूरतों को समझते हुए रेलवे ने सभी नए लोकोमोटिव्स में शौचालय अनिवार्य कर दिया है। पुराने इंजन में डिज़ाइन संशोधन कर रेट्रोफिटिंग प्रक्रिया से यह सुविधा जोड़ी जा रही है, जिससे ट्रेनों के संचालन के दौरान जरूरी आराम सुनिश्चित हो सके।
रनिंग रूम और विश्राम स्थल, वर्किंग ऑवर्स में संतुलन
उच्च ट्रैफिक वाले मार्गों पर नए रनिंग रूम्स का निर्माण किया गया है। यहां लोको पायलटों को पर्याप्त विश्राम की सुविधा मिलती है, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ती है और कार्य घंटों में संतुलन बना रहता है।
फॉग-सेफ्टी, ‘कवच’ टेक्नोलॉजी और ऑनबोर्ड सुविधाएं
वर्तमान में रेलवे ने फॉग सेफ्टी डिवाइस, ड्राइवर अलर्ट सिस्टम, ‘कवच’ टेक्नोलॉजी और आधुनिक ब्रेकिंग सिस्टम को शामिल कर दिया है, जिससे लोको पायलटों को विषम मौसम में भी सुरक्षित संचालन संभव हो रहा है। साथ ही वॉकी-टॉकी और स्टेशन पर ब्रेक टाइम में नाश्ता, शौचालय सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
सभी श्रेणियों की ट्रेनों में लोको पायलटों की सुविधा का ध्यान
मालगाड़ी, पैसेंजर, मेल/एक्सप्रेस और मेट्रो/सबअर्बन ट्रेनों में ड्यूटी करने वाले लोको पायलटों को स्टेशन ठहराव के समय विश्राम, भोजन और तकनीकी सपोर्ट की समुचित सुविधा दी जाती है। स्टेशन स्टाफ द्वारा भी पूरा सहयोग प्रदान किया जाता है।
रेलवे समाचार भोपाल: लोको पायलटों के लिए वेस्ट सेंट्रल रेलवे द्वारा वातानुकूलित लोकोमोटिव, उन्नत ट्रेनिंग और कार्यस्थल में सुधार
