
भोपाल । एम्स भोपाल में विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस 2025 के अवसर पर एक विशेष पोस्ट ग्रेजुएट क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह शैक्षणिक पहल संस्थान के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के नेतृत्व और मार्गदर्शन में संपन्न हुई, जिसका उद्देश्य युवा चिकित्सकों में सिकल सेल रोग के प्रति जागरूकता, अकादमिक उत्कृष्टता और बहु-विषयी सहयोग की भावना को बढ़ावा देना था।
विभागीय सहयोग और आयोजन की विशेषताएँ
इस प्रतियोगिता का आयोजन बाल रोग विभाग के तत्वावधान में किया गया, जिसमें पैथोलॉजी एवं लैब मेडिसिन और मेडिकल ऑन्कोलॉजी एवं हेमेटोलॉजी विभागों ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। क्विज का संचालन डॉ. पूजा सोनी (सीनियर रेजिडेंट) एवं डॉ. योगेन्द्र यादव (एसोसिएट प्रोफेसर, बाल रोग विभाग) द्वारा किया गया।
प्रतियोगिता ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आयोजित की गई, जिसमें सिकल सेल रोग की सामान्य जानकारी, नैदानिक जटिलताएँ, उपचार पद्धतियाँ और रोग प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्रश्नों के माध्यम से सम्मिलित किया गया।
भागीदारी और प्रतिस्पर्धा
प्रतियोगिता में बाल रोग, जनरल मेडिसिन और पैथोलॉजी विभागों के पीजी छात्र (जूनियर रेजिडेंट्स) ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ सहयोग की भावना को भी प्रोत्साहित किया गया, जिससे छात्रों की सैद्धांतिक समझ और व्यवहारिक दक्षता को मजबूती मिली।
प्रथम स्थान: डॉ. मोहनीश (जूनियर रेजिडेंट, पीडियाट्रिक्स)
द्वितीय स्थान: डॉ. सूर्या (जूनियर रेजिडेंट, जनरल मेडिसिन)
तृतीय स्थान: डॉ. स्वस्तिका (जूनियर रेजिडेंट, पीडियाट्रिक्स)
वक्ताओं के विचार
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गौरव ढींगरा (मेडिकल ऑन्कोलॉजी एवं हेमेटोलॉजी) ने प्रतिभागियों की सक्रियता की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएँ छात्रों को जिज्ञासा और अनुसंधान के लिए प्रेरित करती हैं। वहीं, प्रो. भावना ढींगरा ने विजेताओं को बधाई दी और सभी प्रतिभागियों की सशक्त उपस्थिति की प्रशंसा की।
निदेशक का संदेश
इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने कहा:
> “इस प्रकार की शैक्षणिक प्रतियोगिताएँ हमारे युवा चिकित्सकों को जटिल रोगों की समझ, नैदानिक निर्णय क्षमता और रोगी केंद्रित सोच में सशक्त बनाती हैं। सिकल सेल एनीमिया जैसे रोगों के प्रभावी प्रबंधन के लिए बहु-विषयी समन्वय और सामाजिक संवेदनशीलता दोनों की आवश्यकता होती है।”
उन्होंने आयोजन करने वाले सभी विभागों को बधाई देते हुए कहा कि यह पहल निरंतर सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देने वाली है।