गुना के जगनपुर जमीन मामले में उठे सवाल, जिल्द-बंदोबस्त में सरकारी दर्ज भूमि की बिक्री अनुमति हुई थी निरस्त

आरोप: अनुमति के बिना पट्टा भूमि की खरीद-फरोख्त होती रही, अब मौके पर विकसित कॉलोनी की जांच की मांग

गुना। शहर के विकसित हो रहे जगनपुर क्षेत्र में जमीन के स्वामित्व और उसके हस्तांतरण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि ग्राम जगनपुर तहसील गुना की कुछ जमीनें जिल्द-बंदोबस्त के राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय दर्ज थीं, इसके बावजूद इन जमीनों की खरीद-फरोख्त और नामांतरण की प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रही। अब इन जमीनों पर विकसित की गई कथित अवैध कॉलोनी की जांच की मांग उठ रही है।

मामले से जुड़े दस्तावेजों और दावों के अनुसार ग्राम जगनपुर स्थित सर्वे नंबर 68/3 मिन-1, 45/3, 45/4 मिन-5, 68/3 मिन-2, 68/3 मिन-3 और सर्वे नंबर 45/4 की कुछ भूमि को लेकर विवाद है। इनमें पट्टा भूमि भी शामिल बताई गई है।

तत्कालीन कलेक्टर ने बिक्री अनुमति का आवेदन किया था निरस्त

दावा है कि कुछ खरीदारों ने इन जमीनों को खरीदने के बाद आगे बिक्री के लिए तत्कालीन कलेक्टर के समक्ष अनुमति मांगी थी। इस संबंध में कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 01/अ-21/18-19 चला था।

बताया गया है कि तत्कालीन कलेक्टर ने राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद संबंधित जमीनों को जिल्द-बंदोबस्त में शासकीय दर्ज पाया। इसके बाद मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 163 के प्रावधानों का हवाला देते हुए बिक्री अनुमति के आवेदन निरस्त कर दिए गए।

जमीन की बिक्री पर उठे सवाल

मामले में आरोप लगाया गया है कि जिन लोगों ने बिना वैध अनुमति भूमि खरीदी, उनके द्वारा आगे भी जमीन की बिक्री की गई और इन लेन-देन का पंजीयन होता रहा। साथ ही राजस्व रिकॉर्ड में अलग-अलग लोगों के नाम दर्ज होने का भी दावा किया गया है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच आवश्यक है। यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि अलग-अलग समय पर हुए पंजीयन और नामांतरण किस आधार पर किए गए थे।

मौके पर कॉलोनी विकसित होने का दावा

मामले से जुड़े लोगों का आरोप है कि विवादित जमीन के कुछ हिस्सों पर अब कॉलोनी विकसित हो गई है। उनका कहना है कि जिस भूमि की बिक्री अनुमति तत्कालीन कलेक्टर द्वारा निरस्त की गई थी, उस पर हुए निर्माण और प्लॉटिंग की स्थिति की जांच की जानी चाहिए।

आरोप लगाने वालों ने प्रशासन से राजस्व रिकॉर्ड, पंजीयन दस्तावेज, नामांतरण और मौके की वर्तमान स्थिति का मिलान कर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

सर्वे नंबर 45 और 68 को लेकर रिकॉर्ड की जांच की मांग

दावों के अनुसार तहसील स्तर के रिकॉर्ड में सर्वे नंबर 45 और 68 से संबंधित करीब 99 बीघा भूमि जिल्द-बंदोबस्त में ‘पहाड़’ और शासकीय भूमि के रूप में दर्ज बताई गई है। ऐसे में संबंधित भूमि का वर्तमान रिकॉर्ड, स्वामित्व और उपयोग की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही है।

इस पूरे मामले में यह महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन पुराने जिल्द-बंदोबस्त रिकॉर्ड, वर्तमान खसरा, नामांतरण, पंजीयन दस्तावेज और मौके की स्थिति का मिलान कर वास्तविक स्थिति सामने रखे।

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