
इंदौर । इंदौर में प्रदूषित पानी पीने से हुई 18 लोगों की मौत के मामले में घोषित मुआवजे को लेकर तीखा विरोध सामने आया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार काउंसिल ऑफ इंडिया ने नगर निगम और प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए मृतकों के परिजनों को दी जा रही 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि को अपर्याप्त और अमानवीय बताया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव अरुण वर्मा एवं राष्ट्रीय प्रशासनिक प्रभारी अनिल बाजपेई ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि इंदौर में प्रदूषित पेयजल आपूर्ति नगर निगम और प्रशासनिक लापरवाही का प्रत्यक्ष परिणाम है। ऐसे में मृतकों के परिवारों को मात्र 2-2 लाख रुपये का मुआवजा देना किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है।
उन्होंने तर्क दिया कि सरकार स्वयं प्राकृतिक आपदाओं या सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों के परिजनों को 4 लाख से 10 लाख रुपये तक का मुआवजा घोषित करती है। ऐसे में प्रशासनिक चूक से हुई 18 मौतों पर बेहद कम राशि तय करना पीड़ित परिवारों के साथ अन्याय है। राष्ट्रीय मानवाधिकार काउंसिल ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस मामले में प्रत्येक मृतक के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों एवं जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।



