
रायगढ़, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से सामने आई एक तस्वीर और घटना ने प्रशासनिक संवेदनशीलता, मानवाधिकार और कानून के राज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तमनार थाना क्षेत्र की एक घटना में आरोपी बताए जा रहे चित्रसेन साव (साहू समाज) के साथ कथित रूप से किया गया सार्वजनिक अपमान और अमानवीय व्यवहार अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की घोषणा की गई है।
गले में जूतों की माला, शरीर पर चोटों के निशान
सामने आए दृश्य बेहद विचलित करने वाले बताए जा रहे हैं। आरोप है कि चित्रसेन साव को गले में जूते-चप्पलों की माला पहनाई गई, शरीर पर चोट के स्पष्ट निशान थे, कपड़े फटे हुए थे और उसे इस हालत में सार्वजनिक रूप से पेश किया गया। यह दृश्य न केवल संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया जा रहा है, बल्कि सभ्य समाज को शर्मसार करने वाला करार दिया जा रहा है।
आरोपी होना अपमान का लाइसेंस नहीं
मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा गया है साहू समाज के एक व्यक्ति के साथ इस प्रकार का सार्वजनिक अपमान मैंने आज तक नहीं देखा, जो विष्णु देव साय के शासनकाल में हुआ है। यह भी स्पष्ट किया गया कि चित्रसेन साव पर आरोप होना, किसी भी स्थिति में उसकी मानवीय गरिमा, सम्मान और मौलिक अधिकारों को कुचलने का लाइसेंस नहीं हो सकता।
कलेक्टर और एसपी की भूमिका पर सवाल
इस पूरे प्रकरण में रायगढ़ कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि यह सब प्रशासनिक जानकारी या संरक्षण में हुआ, जो कि मानवाधिकार उल्लंघन, पुलिसिया बर्बरता और कानून के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
NHRC में औपचारिक शिकायत की घोषणा
मामले को गंभीर मानते हुए यह घोषणा की गई है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जाएगी,
जिसमें आरोपी के साथ किए गए व्यवहार, प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।



