इंदौर में 12 बच्चों की मौत पर आक्रोश, सीबीआई जांच और प्रति परिवार 1 करोड़ मुआवजे की मांग

इंदौर। इंदौर में नगर निगम प्रशासन की कथित लापरवाही के कारण 12 बच्चों की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर घटना को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने तथा मृतक बच्चों के परिजनों को प्रति परिवार 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है। राष्ट्रीय मानवाधिकार काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव अरुण वर्मा एवं राष्ट्रीय प्रशासनिक प्रभारी अनिल बाजपेई ने संयुक्त बयान में कहा कि यह घटना राज्य शासन और नगर निगम प्रशासन की घोर लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने बड़े हादसे के बावजूद न तो शासन और न ही नगर निगम प्रशासन कोई स्पष्ट जिम्मेदारी लेने को तैयार है, जो कि मानवीय और संवैधानिक दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

अरुण वर्मा ने कहा कि बच्चों की मौत कोई सामान्य घटना नहीं है। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता को उजागर करती है। यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाते और बुनियादी सुविधाओं एवं सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता, तो 12 मासूम बच्चों की जान बचाई जा सकती थी। इसके बावजूद शासन और नगर निगम की चुप्पी पीड़ित परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।

सीबीआई जांच की मांग

राष्ट्रीय मानवाधिकार काउंसिल का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए सीबीआई जांच अनिवार्य है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि लापरवाही के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है और दोषियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।

मुख्यमंत्री से किया अनुरोध

अरुण वर्मा और अनिल बाजपेई ने माननीय मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि इंदौर में 12 बच्चों की मौत के मामले की सीबीआई जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, मृतक बच्चों के परिजनों को प्रति परिवार 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे दोहराए जाते रहेंगे। यह मामला सिर्फ इंदौर का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने का है।

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