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हमारे शिक्षक” ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म 1 जुलाई से लागू, शिक्षकों में ई-अटेंडेंस को लेकर असंतोष

भोपाल, ।  मध्यप्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों की सेवा प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप देने के लिए विकसित “हमारे शिक्षक” ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म का संचालन आगामी 1 जुलाई 2025 से पूरे प्रदेश में अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। इस नई प्रणाली का पायलट ट्रायल 23 जून से 30 जून तक संचालित किया जाएगा।

इस प्लेटफॉर्म के अंतर्गत डिजिटल उपस्थिति, अवकाश स्वीकृति, वेतनमान, पदोन्नति, पेंशन प्रक्रिया, प्रशिक्षण, हितलाभ से संबंधित आवेदन आदि सेवाएं एकीकृत रूप से ऑनलाइन की जाएंगी। शासन का दावा है कि इस पहल से कार्य में पारदर्शिता, प्रभावशीलता, और प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूती मिलेगी।

शिक्षक की डिजिटल उपस्थिति अनिवार्य होगी।

वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति के बिना ऐसे विद्यालयों का निरीक्षण नहीं होगा, जहाँ नियमित ई-अटेंडेंस दर्ज की जाती हो। ऐसे शिक्षक जिनकी उपस्थिति इस प्लेटफॉर्म पर नियमित होगी, उन्हें प्रोत्साहन और विशेष दर्जा भी दिया जाएगा। सेवा पुस्तिका में इस पहल को विशेष उपलब्धि के रूप में दर्ज किया जाएगा।


ई-अटेंडेंस को लेकर शिक्षकों में विरोध के स्वर

हालांकि शासन की इस पहल को डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में एक कदम बताया जा रहा है, लेकिन शिक्षकों के एक वर्ग में इसे लेकर गहरी नाराजगी भी है। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के खेल शिक्षक हीरानंद नरवरिया ने इस पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि “ई-अटेंडेंस न तो शिक्षा हित में है, न ही शिक्षक हित में। यह एक ऐसी प्रणाली है जो शिक्षकों को आतंकित करने जैसा महसूस होती है। शिक्षा विभाग द्वारा बार-बार जारी किए जाने वाले आदेश शिक्षकों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि शिक्षक पहले से ही विषम परिस्थितियों में उत्कृष्ट परिणाम देने का प्रयास कर रहे हैं, फिर भी उन्हें ही प्रयोगशाला बनाकर रखा जा रहा है।  “शिक्षक को अपने विवेक से पढ़ाने की स्वतंत्रता नहीं दी जाती। उसकी नैसर्गिक प्रतिभा का दमन किया जा रहा है।”

‘सभी विभागों पर ई-अटेंडेंस’ की मांग भी अनुचित: नरवरिया

हीरानंद नरवरिया ने यह भी कहा कि हमें यह मांग नहीं करनी चाहिए कि “ई-अटेंडेंस सभी विभागों में लागू की जाए”, बल्कि अपने विभाग की समस्याओं का समाधान तलाशना चाहिए, न कि दूसरों के विभागों को भी उसी आग में झोंकने की दुआ करनी चाहिए।

निष्कर्ष

“हमारे शिक्षक” पोर्टल एक तकनीकी नवाचार के रूप में शिक्षकों की सेवा प्रक्रियाओं को डिजिटल और पारदर्शी बनाने का प्रयास है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन से पहले शिक्षकों की भावनाओं और जमीनी वास्तविकताओं को समझना अनिवार्य है। यदि यह प्रणाली शिक्षक को “सहयोगी” के बजाय “संदेहास्पद” मानकर लागू की जाती है, तो इसके उद्देश्य असफल हो सकते हैं।

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