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बिहार के छपरा में नर्स अंजलि हत्याकांड: न्याय व्यवस्था कटघरे में, सवालों के घेरे में सरकार और पुलिस

छपरा, बिहार। बिहार के छपरा में युवा नर्स अंजलि की जघन्य हत्या ने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। जो बेटी दिन-रात मरीजों की सेवा में लगी रहती थी, उसी के साथ उसके एम्प्लॉयर डॉक्टर और कंपाउंडर द्वारा कथित तौर पर बलात्कार किया गया और फिर निर्ममता से हत्या कर शव को रेलवे ट्रैक के पास फेंक दिया गया। यह वारदात दिसंबर के आखिरी दिनों की बताई जा रही है, लेकिन नया साल शुरू हो चुका है और अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं—यह तथ्य अपने आप में सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करता है।

पोस्टमार्टम से पहले चुप्पी, आरोपी की ‘इजाजत’?

अंजलि के पिता का इंटरव्यू किसी भी संवेदनशील इंसान को भीतर तक तोड़ देता है। आरोप है कि पोस्टमार्टम तक परिवार को कुछ नहीं बताया गया, और जो बताया गया, वह भी आरोपी डॉक्टर की ‘इजाजत’ से—यह कैसा कानून, कैसी प्रक्रिया? जीआरपी जांच की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। क्या सबूतों को समय पर सुरक्षित किया गया? क्या पीड़ित परिवार को अधिकारों की जानकारी दी गई? जवाब अब तक नदारद हैं।

महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि बिहार में महिलाओं की सुरक्षा की सच्चाई को उजागर करता है। गांव-देहात में ऐसी घटनाओं का दब जाना, प्रभावशाली लोगों का बच निकलना और पीड़ित परिवार का दर-दर भटकना—क्या यही सुशासन है? #Justice4Anjali के नाम से कैंडल मार्च निकल रहे हैं, सोशल मीडिया पर गुस्सा उबाल पर है, लेकिन आरोपी खुले घूम रहे हैं। यह स्थिति जनता के भरोसे को तोड़ती है।

नीतीश कुमार और बिहार पुलिस से सवाल

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बिहार पुलिस से सीधा सवाल है—कितने दिन और इंतजार करवाएंगे? क्या महिलाओं की सुरक्षा केवल घोषणाओं तक सीमित रह गई है? क्या इस मामले में फास्ट-ट्रैक जांच, तत्काल गिरफ्तारी, और कड़ी धाराओं में कार्रवाई होगी?

अब चुप्पी नहीं, कार्रवाई चाहिए

ऐसे मामलों में चुप्पी अपराध को बढ़ावा देती है। आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच, पीड़ित परिवार को न्याय और दोषियों को कठोरतम सजा—यही एकमात्र रास्ता है। वरना यह सिलसिला रुकेगा नहीं, और हर अंजलि के साथ न्याय की उम्मीद दम तोड़ती रहेगी।

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