
पशुपालन विभाग का नाम अब गोपालन विभाग होगा।
प्रत्येक जिले में आदर्श गौशालाओं की स्थापना होगी।
भोपाल। मध्यप्रदेश में गौसेवा और गोपालन को समर्पित एक ऐतिहासिक पहल करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य स्तरीय गौशाला सम्मेलन के मंच से एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अब ‘पशुपालन विभाग’ को ‘गोपालन विभाग’ के नाम से जाना जाएगा। यह निर्णय प्रदेश में गायों की सेवा, संरक्षण और संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के संकल्प का प्रतीक है।
डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार गौवंश के संरक्षण को केवल सांस्कृतिक या धार्मिक विषय नहीं मानती, बल्कि यह कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पुनर्जीवन का आधार है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अब विभागीय योजनाएं और कार्यशैली इस सोच के अनुरूप पुनर्गठित की जाएंगी, ताकि गौसेवा को संस्थागत रूप से मजबूती दी जा सके।
गौशाला सम्मेलन में उठे जनहित के मुद्दे
राज्य स्तरीय गौशाला सम्मेलन में प्रदेश भर की पंजीकृत गौशालाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने वित्तीय सहायता, चारे की आपूर्ति, चिकित्सा सुविधाओं और संरचनात्मक विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दे सरकार के समक्ष रखे। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि हर जिले में आदर्श गौशालाओं का निर्माण और संचालन किया जाएगा, तथा गोपालकों को प्रशिक्षण और सम्मानजनक आजीविका के अवसर भी प्रदान किए जाएंगे।
गौरक्षा को मिलेगा कानूनी और प्रशासनिक बल
मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिए कि गौ-तस्करी और अत्याचार के विरुद्ध कानूनों को और अधिक कठोर बनाया जाएगा, तथा ‘गोसेवा आयोग’ को और अधिक अधिकार दिए जाएंगे। साथ ही गौसेवा से जुड़ी योजनाओं को जनभागीदारी से संचालित करने की दिशा में भी तेजी से कार्य होगा।
यह घोषणा सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि सरकार की गौ आधारित विकास नीति की स्पष्ट अभिव्यक्ति है, जो ग्रामीण संस्कृति, परंपरा और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की ओर अग्रसर है।