भोपाल, । एम्स भोपाल (AIIMS Bhopal) ने नवजात चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। संस्थान की कुशल चिकित्सा टीम ने 1 किलोग्राम से भी कम वज़न वाले समयपूर्व जन्मे शिशु का सफलतापूर्वक इलाज कर उसे नया जीवनदान दिया। यह मामला मेडिकल तकनीक, डॉक्टरों के समर्पण और परिवार के धैर्य का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
गंभीर जटिलताओं के बीच नवजीवन की उम्मीद बनी एम्स भोपाल
प्रसवपूर्व अवधि के दौरान मां को एम्स भोपाल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग (OBGY) में विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया। जटिल गर्भावस्था की स्थिति को देखते हुए समयपूर्व प्रसव हुआ, और शिशु का वजन जन्म के समय मात्र 980 ग्राम था। ऐसे हालात में शिशु को तुरंत नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती किया गया।
तीन महीनों तक, एम्स भोपाल की नवजात विशेषज्ञों, नर्सिंग स्टाफ और पीडियाट्रिक टीम ने दिन-रात समर्पण के साथ शिशु की देखभाल की। नियमित मॉनिटरिंग, पोषण प्रबंधन और मेडिकल इंटेंसिव केयर के माध्यम से शिशु को स्वस्थ अवस्था में घर भेजा गया।
परिवार की भावनात्मक यात्रा और डॉक्टरों की प्रतिबद्धता
यह नवजात उनके माता-पिता के लिए बेहद खास था, क्योंकि वे आठ वर्षों के लंबे इंतजार के बाद माता-पिता बने थे। बच्चे के स्वस्थ होकर घर लौटने पर उन्होंने एम्स भोपाल की चिकित्सा टीम के प्रति गहरा आभार प्रकट किया।
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने कहा:
> “यह केवल चिकित्सा उपचार नहीं, बल्कि विश्वास, धैर्य और समर्पण की कहानी है। हम हर मरीज को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और यह सफलता हमारी टीम के सामूहिक प्रयास का प्रमाण है।”
फॉलोअप देखभाल: High-Risk Newborn OPD में निगरानी
वर्तमान में शिशु की नवजात शिशु विभाग की हाई-रिस्क ओपीडी में नियमित जांच और विकास पर नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञ डॉक्टर न केवल शारीरिक विकास, बल्कि न्यूरोलॉजिकल व मानसिक विकास पर भी पैनी निगाह रख रहे हैं।
एम्स भोपाल की उपलब्धि का महत्व
प्रीमैच्योर नवजात का सफल उपचार
1 किलो से कम वजन वाले नवजात के लिए जीवनदायिनी NICU देखभाल
तीन महीने की सतत चिकित्सकीय सेवा
उच्च जोखिम नवजातों के लिए विशेष फॉलोअप सुविधा
मध्यप्रदेश में नवजात चिकित्सा का एक मॉडल केस
एम्स भोपाल में चिकित्सा विज्ञान की मिसाल: 1 किलो से कम वज़न वाले नवजात को मिला जीवनदान
