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रीवा में “चोटी कांड” में नया मोड़, पुलिस जांच में झूठा पाया गया आरोप

चोरी के शक में मारपीट, चोटी उखाड़ने का दावा असत्य

रीवा (मध्य प्रदेश) – रीवा के बैकुंठपुर थाना अंतर्गत मझिगवां गांव में “चोटी कांड” ने नई दिशा ले ली है। पहले जहां यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चा का विषय बन गया था कि दीपक पांडेय ने रोहित यादव की चोटी उखाड़ दी, वहीं अब पुलिस जांच में इस आरोप को झूठा पाया गया है।

घटना के अनुसार, दीपक पांडेय और रोहित यादव के बीच डीजल चोरी के शक को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। इस विवाद के दौरान दीपक पांडेय ने रोहित यादव के साथ मारपीट की। रोहित यादव ने पुलिस को बताया कि मारपीट के दौरान उसकी चोटी भी उखाड़ी गई, लेकिन एसडीओपी उमेश प्रजापति ने स्पष्ट किया कि मेडिकल जांच और रिपोर्ट में चोटी उखाड़ने की पुष्टि नहीं हुई।

पुलिस ने बताया कि पीड़ित से उसकी चोटी मांगी गई थी, लेकिन उसने इसे देने से इनकार कर दिया। इस मामले में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि दीपक पांडेय का पिछला आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है, जो पुलिस के लिए जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य बन गया है।

एसडीओपी उमेश प्रजापति ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान के आधार पर यह साफ हुआ कि चोटी उखाड़ने का आरोप सत्य नहीं है। फिलहाल मारपीट और अन्य आपराधिक पहलुओं पर मामला आगे बढ़ाया जा रहा है।



स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना ने गांव में तनाव बढ़ा दिया था। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर काफी बहस हुई, जिसमें कई लोग पुलिस की कार्रवाई और मारपीट की वजहों पर सवाल उठा रहे थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में आरोपों की पुष्टि करना बेहद जरूरी है, क्योंकि बिना सबूत के फैलाए गए बयान समाज में अफवाहों और हिंसा को जन्म दे सकते हैं। इस घटना ने यह भी दिखाया कि डीजल चोरी और विवाद जैसी छोटी-छोटी घटनाएं भी गंभीर अपराधों में बदल सकती हैं, अगर समय पर कानूनी कार्रवाई नहीं की जाए।

निष्कर्ष

रीवा के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र का यह “चोटी कांड” अब झूठे आरोपों के खुलासे के बाद नया मोड़ ले चुका है। पुलिस की सक्रिय जांच और मेडिकल रिपोर्ट ने मामले की सच्चाई सामने ला दी है। दोनों पक्षों के बीच मारपीट और आपराधिक गतिविधियों पर आगे की कार्रवाई जारी है, और अधिकारियों ने गांववासियों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

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