बालाघाट, मध्यप्रदेश। जिले के एक गांव में आदिवासी महिला की हत्या ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। मृतका उसी गांव की निवासी थी और आरोपी हरी पालवी एवं सुनील धुर्वे भी महिला के परिचित बताए जा रहे हैं। दोनों आरोपी उसी गांव के रहने वाले हैं, जिससे इस घटना ने स्थानीय समुदाय की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजा गया
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हत्या की पृष्ठभूमि में आपसी परिचय और विश्वास का दुरुपयोग किया गया, जो महिला सुरक्षा के लिए अत्यंत चिंता का विषय है।
सामाजिक आक्रोश और न्याय की मांग
सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ता हंसराज मीणा ने ट्वीट कर घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा,
“अगर महिला आदिवासी थी, तो उसके हत्यारे भी आदिवासी थे! उम्मीद है कि इन हत्यारों को फांसी की सज़ा मिले।”
उनका यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि जातीय या सामाजिक पृष्ठभूमि से इतर, अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोरतम सजा मिलनी चाहिए, ताकि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
आदिवासी समाज में महिलाओं की सुरक्षा पर उठे सवाल
यह मामला आदिवासी समाज में महिला सुरक्षा की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है। जिस तरह से महिला के अपने ही गांव के लोगों ने इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया, वह न केवल एक आपराधिक कृत्य है, बल्कि सामाजिक नैतिकता पर भी आघात है।
फांसी की सजा की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों द्वारा आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि ऐसे अपराधियों के लिए कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए, ताकि यह घटना एक उदाहरण बने और समाज में महिला सुरक्षा को लेकर भरोसा कायम हो सके।
यह मामला न केवल आदिवासी समाज में घटित एक दुखद घटना है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के लिए एक चेतावनी है कि महिला सुरक्षा और सामाजिक न्याय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
बालाघाट में आदिवासी महिला की हत्या: गांव के ही दो आरोपी गिरफ्तार, फांसी की सज़ा की उठी मांग
