टीकमगढ़ के हैदरपुरा में लोकतंत्र की हत्या: दलित महिला सरपंच दिल्ली में मजदूरी करने को मजबूर, दबंग चला रहे पंचायत – मुकेश बंसल का गंभीर आरोप

भोपाल। मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायत हैदरपुरा (तहसील बड़ागांव) से लोकतांत्रिक व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। बांस शिल्पकार युवा शक्ति संगठन एवं धानुक समाज के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश बंसल ने आरोप लगाया है कि गांव में निर्वाचित दलित महिला सरपंच को दबंगों द्वारा प्रताड़ित कर पद से बेदखल कर दिया गया है और पंचायत का संचालन अनधिकृत रूप से रसूखदार लोग कर रहे हैं।
श्री बंसल ने इस पूरे घटनाक्रम को “लोकतंत्र की हत्या” करार देते हुए कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग की निर्वाचित महिला सरपंच रामकुंवर बंशकार (पति पप्पू बंशकार) सामंती मानसिकता के दबाव और प्रताड़ना के कारण गांव छोड़कर दिल्ली में मजदूरी करने को मजबूर हो गई हैं। जबकि कानूनन पंचायत संचालन का अधिकार केवल निर्वाचित सरपंच का होता है, लेकिन गांव के कुछ दबंग लोग अवैध रूप से पंचायत चला रहे हैं।
सरपंच के अधिकारों का खुला अपहरण
मुकेश बंसल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दबंगों ने सरपंच के संवैधानिक अधिकारों का पूरी तरह अपहरण कर लिया है। उन्होंने महिला सरपंच की आधिकारिक सील, रजिस्टर और हस्ताक्षरित कागजात अपने कब्जे में ले रखे हैं। सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन निर्वाचित जनप्रतिनिधि की जगह अनधिकृत लोग कर रहे हैं, जो पूरी तरह गैरकानूनी है।
उन्होंने कहा कि यह अत्यंत शर्मनाक स्थिति है कि गांव की निर्वाचित मुखिया को दबंगों के भय से अपना घर-परिवार छोड़ना पड़ा और आज वह अपने बच्चों के पालन-पोषण के लिए दिल्ली में मजदूरी कर रही हैं।
दुर्घटना के बाद सामने आया मामला
श्री बंसल के अनुसार इस गंभीर प्रकरण का खुलासा तब हुआ जब सरपंच के पुत्र अक्षय बंशकार की सड़क दुर्घटना हुई। तब पता चला कि गांव की निर्वाचित सरपंच लंबे समय से गांव में रह ही नहीं रही हैं और आजीविका के लिए बाहर मजदूरी कर रही हैं, जबकि पंचायत पर पूरी तरह दबंगों का कब्जा है।
प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों के हवाले से श्री बंसल ने आरोप लगाया कि टीकमगढ़ कलेक्टर और संबंधित प्रशासनिक अमला इस पूरे मामले से अवगत होने के बावजूद पूरी तरह मौन बना हुआ है। प्रशासन की यह उदासीनता दबंगों के हौसले बढ़ा रही है और लोकतांत्रिक व्यवस्था का खुला मजाक बन रहा है।
कानून का खुला उल्लंघन
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का सीधा उल्लंघन है। साथ ही यह कृत्य अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम तथा पंचायती राज अधिनियम के तहत भी गंभीर दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
निर्वाचित जनप्रतिनिधि को डरा-धमकाकर उसके अधिकारों से वंचित करना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर सीधा हमला है।
मुख्यमंत्री और डीजीपी से हस्तक्षेप की मांग
मुकेश बंसल ने इस मामले को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने प्रमुख रूप से निम्न मांगें रखी हैं—
मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए
महिला सरपंच को सुरक्षा और सम्मानपूर्वक कार्य करने का अधिकार दिलाया जाए
पंचायत की सील और दस्तावेजों पर कब्जा करने वाले दबंगों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए
लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल कर निर्वाचित सरपंच को पुनः पंचायत संचालन का अधिकार सौंपा जाए
श्री बंसल ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने इस सामंती व्यवस्था के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि क्षेत्र में कानून का राज नहीं, बल्कि बाहुबलियों का शासन चल रहा है।
उन्होंने पत्र के माध्यम से मांग की है कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए दोषियों के विरुद्ध शीघ्र और कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।



