गुना–शिवपुरी रेलखंड पर सुरक्षा और स्टेशन आधुनिकीकरण की बड़ी समीक्षा: डीआरएम ने अमृत भारत योजना और संरक्षा व्यवस्थाओं का लिया जायजा

Bhopal Railway Division के मंडल रेल प्रबंधक Pankaj Tyagi ने गुना–शिवपुरी और गुना–बीना रेलखंड का व्यापक निरीक्षण कर रेलवे सुरक्षा, यात्री सुविधाओं और स्टेशन पुनर्विकास कार्यों की समीक्षा की।
यह निरीक्षण ऐसे समय हुआ है जब भारतीय रेलवे सुरक्षा आधुनिकीकरण, स्टेशन पुनर्विकास और परिचालन दक्षता बढ़ाने पर बड़े स्तर पर निवेश कर रही है।
अमृत भारत स्टेशन योजना पर फोकस
निरीक्षण के दौरान Guna, Shivpuri और Ashoknagar रेलवे स्टेशनों पर चल रहे Amrit Bharat Station Scheme के कार्यों की समीक्षा की गई।
इस योजना का उद्देश्य केवल स्टेशन सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक यात्री केंद्रों में बदलना है। इसके तहत बेहतर प्रतीक्षालय, डिजिटल सूचना प्रणाली, स्वच्छता, सुगम पहुंच और आधुनिक यात्री सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है।
डीआरएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य गुणवत्ता और समयसीमा दोनों के अनुरूप पूरे किए जाएं।
रेल सुरक्षा पर विशेष जोर
निरीक्षण के दौरान ट्रैक की स्थिति, सिग्नलिंग प्रणाली, समपार फाटक और परिचालन सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं का भी विस्तृत अवलोकन किया गया।
रेल विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय रेलवे में सुरक्षा अब केवल दुर्घटनाएं रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि “प्रोएक्टिव मॉनिटरिंग” की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। नियमित निरीक्षण उसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
समपार फाटक अब भी बड़ी चुनौती
डीआरएम ने बदरवास–कोलारस के बीच स्थित समपार फाटक संख्या 28 का भी निरीक्षण किया और वहां मौजूद सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
भारत में बड़ी संख्या में रेल दुर्घटनाएं अब भी मानव रहित या असुरक्षित रेलवे क्रॉसिंग से जुड़ी होती हैं। हालांकि रेलवे लगातार ओवरब्रिज और अंडरपास निर्माण पर काम कर रहा है, लेकिन कई क्षेत्रों में समपार फाटक अब भी जोखिम वाले बिंदु बने हुए हैं।
निरीक्षण के दौरान गेटमेन को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए और उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित भी किया गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि रेलवे सुरक्षा में तकनीक के साथ मानव संसाधन की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण रहती है।
रनिंग स्टाफ की कार्य स्थितियों पर भी समीक्षा
गुना में लोको पायलट और गार्ड लॉबी का निरीक्षण भी इस दौरे का अहम हिस्सा रहा। डीआरएम ने रनिंग स्टाफ के विश्राम, काउंसलिंग और सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की।
रेलवे संचालन विशेषज्ञों के अनुसार लंबी ड्यूटी, मानसिक दबाव और थकान कई बार परिचालन जोखिम बढ़ा सकती है। इसी वजह से रेलवे अब लोको पायलटों और गार्डों के कार्य वातावरण तथा मानसिक स्वास्थ्य पर भी अधिक ध्यान दे रही है।



