State

भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक 2025: सागर में निकली भव्य चल यात्रा, गोविंद सिंह राजपूत ने कहा – अहिंसा का मार्ग ही मानवता का आधार

महावीर जयंती 2025 सागर: गोविंद सिंह राजपूत ने किया अहिंसा संदेश का प्रचार

भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक 2025 पर सागर में निकली चल यात्रा

महावीर स्वामी के सिद्धांतों को अपनाएं – गोविंद सिंह राजपूत ने दी शुभकामनाएं


सागर, मध्यप्रदेश। पूरे देशभर में भगवान महावीर स्वामी के 2624वें जन्म कल्याणक महोत्सव 2025 को श्रद्धा, भक्ति और अहिंसा के भाव से मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने सागर शहर में आयोजित भव्य चल यात्रा और महाआरती में शामिल होकर प्रदेशवासियों को महावीर जयंती 2025 की शुभकामनाएँ दीं।

“भगवान महावीर स्वामी ने दिखाया शांति, करुणा और अहिंसा का मार्ग” — गोविंद सिंह राजपूत

इस अवसर पर मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि भगवान महावीर सिर्फ जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर ही नहीं, बल्कि मानवता और नैतिक जीवन के प्रतीक हैं। उन्होंने अहिंसा परमो धर्म का ऐसा संदेश दिया, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है। “भगवान महावीर स्वामी ने हमें यह सिखाया कि प्रत्येक जीव मात्र में आत्मा है और उसके प्रति करुणा रखना ही सच्चा धर्म है,” — मंत्री राजपूत ने कहा।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज की दौड़ती-भागती दुनिया में भगवान महावीर के अहिंसात्मक विचार और स्व-अनुशासन पर आधारित जीवनशैली को अपनाना ही समाज में शांति और संतुलन ला सकता है।

सागर में भव्य चल समारोह और महाआरती का आयोजन

महावीर जन्म कल्याणक 2025 के उपलक्ष्य में सागर शहर में एक विशाल चल यात्रा का आयोजन किया गया। यह यात्रा विद्या भवन खुरई रोड से प्रारंभ होकर ओवर ब्रिज, विजय टॉकीज चौराहा, तीन बत्ती, होते हुए गौराबाई मंदिर कटरा बाजार पहुंची, जहाँ पर श्रद्धालुओं द्वारा महाआरती का भव्य आयोजन किया गया।

इस दौरान सागर शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भारी संख्या में जैन समाज और अन्य श्रद्धालु इस आयोजन में सम्मिलित हुए। चल यात्रा में धार्मिक झांकियाँ, ध्वज, और महावीर स्वामी के उपदेशों से सजे पोस्टर लोगों को जीवन मूल्यों की याद दिला रहे थे।

धार्मिक एकता और सामाजिक समरसता का संदेश

इस आयोजन ने न केवल जैन समाज को एकजुट किया, बल्कि सभी धर्मों और वर्गों के लोगों को महावीर स्वामी के सार्वभौमिक संदेश से जोड़ने का कार्य किया। ‘जियो और जीने दो’, ‘अहिंसा ही सच्चा धर्म है’ जैसे नारे गूंजते रहे और वातावरण को शुद्ध, शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक बना दिया।

Related Articles