भोपाल। मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर हलचल मच गई है, क्योंकि राज्य के पूर्व मुख्य सचिव (C.S.) इकबाल सिंह और मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के पूर्व CEO ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में लोकायुक्त संगठन द्वारा जांच शुरू कर दी गई है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारियों पर पद के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितता और योजनागत फंड के गबन जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने प्राथमिक जांच की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
क्या हैं आरोप?
बताया जा रहा है कि यह मामला राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त योजनाओं से जुड़ा है। आरोप है कि योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान मनमाने ढंग से ठेके दिए गए, वित्तीय प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भुगतान किए गए। आरोपों के अनुसार, इन गतिविधियों में उच्च स्तर पर मिलीभगत की संभावना है।
लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच प्रारंभ
लोकायुक्त संगठन के सूत्रों ने पुष्टि की है कि शिकायतों की पुष्टि के बाद प्रारंभिक जांच आदेशित की गई है। जांच दल अब दस्तावेजों की पड़ताल, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और योजनागत रिकॉर्ड खंगालने में जुटा है। जल्द ही संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान भी लिए जा सकते हैं।
प्रशासनिक हलकों में हड़कंप
पूर्व मुख्य सचिव और एक वरिष्ठ मिशन अधिकारी का नाम इस प्रकार के मामले में सामने आना, राज्य प्रशासनिक सेवा के लिए झटका माना जा रहा है। यह मामला उन योजनाओं से जुड़ा है जिनका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी बनाना और आजीविका के स्थायी साधन उपलब्ध कराना था। यदि अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो यह न केवल वित्तीय घोटाले की दृष्टि से गंभीर मामला होगा, बल्कि सामाजिक योजनाओं की साख को भी ठेस पहुँचाएगा।
लोकायुक्त की निष्पक्षता पर भरोसा
पूर्व में भी लोकायुक्त संगठन ने कई उच्च पदस्थ अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की है। इसलिए इस मामले में भी निष्पक्ष और सघन जांच की अपेक्षा की जा रही है। प्रारंभिक जांच के बाद यदि आवश्यक हुआ तो एफआईआर दर्ज कर विधिवत जांच शुरू की जा सकती है।
पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह और आजीविका मिशन के पूर्व CEO ललित मोहन बेलवाल के खिलाफ लोकायुक्त जांच शुरू
