उत्तर प्रदेश में बड़ा खुलासा: भगोड़े राशिद नसीम से जुड़े योगी सरकार के मीडिया सलाहकार पर सवाल, ईडी दस्तावेजों से उठा बवंडर

लखनऊ । उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार, जो “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति के लिए जानी जाती है, अब सवालों के घेरे में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार सिंह की एक निजी कंपनी और हज़ारों करोड़ रुपये की ठगी कर देश से फरार घोषित भगोड़े राशिद नसीम की कंपनियों के बीच वित्तीय लेन-देन सामने आया है। यह सनसनीखेज खुलासा ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के दस्तावेज़ों से हुआ है।

ईडी की जांच में बड़ा खुलासा: Shinecity और Bhavya Broadcast से मिले करोड़ों

प्रवर्तन निदेशालय के दस्तावेज़ों के अनुसार, भगोड़े राशिद नसीम की दो कंपनियों – Shinecity Infra और Bhavya Broadcast ने MSB Creations Pvt. Ltd. को लगभग 5 करोड़ रुपये का लोन दिया था। इस कंपनी के डायरेक्टर मृत्युंजय कुमार सिंह और भारती सिंह थे। दिलचस्प बात यह है कि मृत्युंजय कुमार, उत्तर प्रदेश सरकार में योगी आदित्यनाथ के मीडिया एडवाइज़र के पद पर तैनात हैं।

सरकारी पद पर रहते हुए निजी कंपनी में डायरेक्टरशिप, सवालों के घेरे में मृत्युंजय सिंह

इस मामले को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि मृत्युंजय कुमार सिंह ने अपनी डायरेक्टरशिप के दौरान कंपनी के रजिस्ट्रेशन दस्तावेज़ों में सरकारी पते का इस्तेमाल किया। यह सरकारी सेवा नियमों का संभावित उल्लंघन भी हो सकता है।

राशिद नसीम के खिलाफ 554 एफआईआर, फिर भी यूपी पुलिस की लापरवाही क्यों?

राशिद नसीम पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में 554 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं। उन पर हजारों निवेशकों से हजारों करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप है। बावजूद इसके, उनके खिलाफ यूपी पुलिस की जांच में गंभीर ढिलाई बरती गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट को कई बार यूपी पुलिस को फटकार लगानी पड़ी।

रेड कॉर्नर नोटिस के बावजूद ‘मेहरबान’ क्यों है सिस्टम?

Interpol द्वारा जारी Red Corner Notice के बाद भी राशिद नसीम इस वक्त दुबई में सुरक्षित बताया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि आखिर इस भगोड़े पर उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन इतनी मेहरबानी क्यों दिखा रहा है?

IO को हटाने के बाद भी वापस EOW में तैनाती, क्या है इसके पीछे की सच्चाई?

हाईकोर्ट के आदेश पर जिस जांच अधिकारी (IO) को राशिद नसीम के साथ मिलीभगत के आरोपों में हटाया गया था, उसे कुछ ही समय बाद फिर से आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में तैनात कर दिया गया। यह सिस्टम की पारदर्शिता और ईमानदारी पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

क्या योगी सरकार कराएगी निष्पक्ष जांच?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अपने ही मीडिया सलाहकार से जुड़े इस गंभीर मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराएगी? या फिर ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ का दावा सिर्फ़ एक जुमला बनकर रह जाएगा?

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