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मंत्रालय सहित प्रदेश के कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर आज वल्लभ भवन पर संयुक्त विरोध प्रदर्शन

भोपाल,। प्रदेश के मंत्रालयीन कर्मचारियों और अन्य शासकीय कर्मियों की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर आज राजधानी भोपाल में बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है। यह प्रदर्शन मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ और मध्यप्रदेश कर्मचारी मंच के संयुक्त तत्वावधान में होगा।

प्रदर्शन का समय और स्थान

दिनांक: 16 जनवरी 2025 (शुक्रवार)

समय: अपराह्न 01:30 बजे

स्थान: वल्लभ भवन क्रमांक–01, मेन गेट, भोपाल


कर्मचारी संगठनों द्वारा इस प्रदर्शन की पूर्व सूचना शासन को विधिवत दे दी गई है।

प्रमुख मांगें जिनको लेकर हो रहा प्रदर्शन

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से शासन स्तर पर उनकी न्यायोचित मांगों की अनदेखी की जा रही है। इसी के विरोध में यह आंदोलन किया जा रहा है। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—

मंत्रालयीन कर्मचारियों को चौथा समयमान वेतनमान प्रदान किया जाए

मंत्री स्थापना एवं मंत्रालय स्थापना में कार्यरत आकस्मिकता निधि कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए

कर्मचारियों को 03 प्रतिशत महंगाई भत्ता तत्काल दिया जाए

स्थायी कर्मियों एवं आउटसोर्स कर्मचारियों को डाइंग कैडर घोषित करने के प्रस्ताव का विरोध

समयमान वेतनमान के साथ उच्च पदनाम प्रदान किया जाए

मंत्रालयीन लिपिकों को तृतीय समयमान में तृतीय पदोन्नति का वेतनमान दिया जाए

पुरानी पेंशन योजना की बहाली की जाए

70%-80% वेतन देने संबंधी आदेश को निरस्त करने के हाईकोर्ट के निर्णय को लागू किया जाए

वर्ष 2012 में मंत्री स्थापना से मंत्रालय स्थापना में आए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पे-प्रोटेक्शन का लाभ दिया जाए


कर्मचारियों में भारी आक्रोश

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बार-बार ज्ञापन देने और शासन स्तर पर चर्चा के बावजूद मांगों का समाधान नहीं किया गया है, जिससे प्रदेशभर के कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। इसी कारण मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

संगठनों के पदाधिकारियों ने मंत्रालय सहित प्रदेश के सभी शासकीय कर्मचारियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में प्रदर्शन में शामिल होकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित करें।

शासन की प्रतिक्रिया पर नजर

आज होने वाले इस प्रदर्शन पर शासन-प्रशासन की पैनी नजर है। माना जा रहा है कि कर्मचारियों की संख्या और दबाव को देखते हुए शासन स्तर पर जल्द ही कोई ठोस निर्णय लिया जा सकता है।

कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन की आगे की रणनीति बनाई जाती रहेगी।

आज का यह प्रदर्शन प्रदेश के कर्मचारी आंदोलन की दिशा तय करने वाला अहम कदम माना जा रहा है।

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