जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद: अब स्कूलों में विद्यार्थियों को सिखाए जाएंगे कानून, अधिकार और नागरिक जिम्मेदारियां

मध्यप्रदेश पुलिस और स्कूल शिक्षा विभाग की संयुक्त पहल, 57 जिलों के प्रशिक्षकों का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्पन्न

भोपाल, 5 जून 2026। मध्यप्रदेश में युवाओं को कानून, अधिकारों, कर्तव्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से शुरू किए जा रहे “जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद” कार्यक्रम को लेकर महत्वपूर्ण तैयारी पूरी कर ली गई है। मध्यप्रदेश पुलिस के सामुदायिक पुलिसिंग प्रभाग एवं स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 2 से 4 जून तक भोपाल स्थित मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी में तीन दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम (ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स-टीओटी) का सफल आयोजन किया गया।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रदेशभर के विद्यालयों में संचालित होने वाले सृजन संवाद कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस अधिकारियों और शिक्षकों को प्रशिक्षित करना था।

कानून और नागरिक जिम्मेदारियों से जोड़ी जाएगी युवा पीढ़ी

कार्यक्रम के तहत कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को कानून, मानवाधिकार, नागरिक कर्तव्यों, सार्वजनिक सुरक्षा, लैंगिक समानता और जिम्मेदार नागरिकता से जुड़े विषयों की व्यवहारिक जानकारी दी जाएगी। विद्यार्थियों को यह भी समझाया जाएगा कि कानून उनके दैनिक जीवन को किस प्रकार प्रभावित करता है तथा आवश्यकता पड़ने पर वे पुलिस और अन्य संस्थाओं की सहायता कैसे प्राप्त कर सकते हैं।

इस पहल का उद्देश्य केवल कानूनी जानकारी देना नहीं, बल्कि युवाओं में जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने की भावना विकसित करना भी है।

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ उद्घाटन और समापन

प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन अभिषेक सिंह, डॉ. विनीत कपूर, एच.एन. नेमा, अमृत मीणा, डॉ. संजय अग्रवाल, प्रणय नागवंशी तथा United Nations Population Fund के राज्य प्रमुख सुनील थॉमस जैकब की उपस्थिति में हुआ।

समापन सत्र में देव प्रकाश गुप्ता, नंदा भलाबे कुसरे, रश्मि पाण्डेय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

साइबर सुरक्षा से लेकर पॉक्सो कानून तक मिला प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी। इनमें भारतीय संविधान, मानवाधिकार, बाल अधिकार, किशोर न्याय अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम, बाल विवाह प्रतिषेध कानून, महिला सुरक्षा, सड़क सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, नशा उन्मूलन और पुलिस व्यवस्था जैसे विषय शामिल रहे।

राज्य साइबर सेल की टीम ने साइबर अपराधों और ऑनलाइन सुरक्षा पर विशेष सत्र आयोजित किया, जबकि मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता डॉ. अंकुश वर्मा ने किशोरों के साथ प्रभावी संवाद और सहभागितापूर्ण प्रशिक्षण तकनीकों पर मार्गदर्शन दिया।

सामाजिक संस्थाओं ने भी निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के विशेषज्ञों ने भी भागीदारी की। बचपन संस्था, संगिनी संस्था, आरम्भ संस्था और जनसाहस संस्था के प्रतिनिधियों ने मानवाधिकार, महिला अधिकार, बाल संरक्षण और लैंगिक संवेदनशीलता से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किया।

विशेषज्ञों ने व्यावहारिक अनुभव साझा करते हुए प्रतिभागियों को विद्यार्थियों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने के तरीके भी बताए।

57 जिलों से पहुंचे पुलिस अधिकारी और शिक्षक

कार्यक्रम में प्रदेश के सभी 57 जिलों, जिनमें भोपाल और इंदौर ग्रामीण जिले भी शामिल हैं, से प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रत्येक जिले से एक डीएसपी स्तर के अधिकारी, एक उप निरीक्षक स्तर के अधिकारी और एक्सीलेंस स्कूलों के दो-दो व्याख्याताओं को प्रशिक्षण दिया गया।

इस संयुक्त प्रशिक्षण ने पुलिस और शिक्षा विभाग के बीच समन्वय को मजबूत करने के साथ-साथ कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन की मजबूत नींव तैयार की है।

जून से स्कूलों में शुरू होंगे संवादात्मक सत्र

स्कूल शिक्षा विभाग से औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद अब “जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद” कार्यक्रम को प्रदेशभर में लागू किया जाएगा। नए शिक्षण सत्र के साथ जून 2026 से चयनित विद्यालयों में प्रशिक्षित पुलिस अधिकारी और शिक्षक संयुक्त रूप से लगभग ढाई घंटे के संवादात्मक सत्र आयोजित करेंगे।

इन सत्रों में समूह चर्चा, प्रश्नोत्तर, व्यवहारिक उदाहरण और सहभागितापूर्ण गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को कानून, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारियों की जानकारी दी जाएगी।

पुलिस, विद्यालय और समाज के बीच बनेगा मजबूत सेतु

मध्यप्रदेश पुलिस और स्कूल शिक्षा विभाग की यह पहल युवाओं को जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह कार्यक्रम पुलिस, विद्यालय और समाज के बीच विश्वास और संवाद का एक मजबूत सेतु स्थापित करेगा तथा कानून के प्रति सम्मान रखने वाली नई पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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