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स्वास्थ्य संस्थानों में मानव अधिकारों की जांच: राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ले रहा स्वास्थ्य सेवाओं पर फीडबैक

भोपाल। नागरिकों को दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं में मानव अधिकारों की स्थिति का आकलन करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली के विशेष प्रतिनिधि श्री उमेश कुमार शर्मा ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रातीबड़ का निरीक्षण किया। इस दौरे के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य संस्था में मरीजों को दी जा रही सुविधाओं और सेवाओं की गहन समीक्षा की।

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा देशभर के स्वास्थ्य संस्थानों में मानव अधिकारों से संबंधित सेवाओं की निगरानी, मूल्यांकन और रिपोर्टिंग की जा रही है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत आयोग के प्रतिनिधि जिला अस्पतालों, सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सिविल डिस्पेंसरी और संजीवनी क्लिनिक जैसे संस्थानों का दौरा कर रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि मरीजों एवं हितग्राहियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं पर प्रत्यक्ष फीडबैक लिया जाए।

निरीक्षण के दौरान श्री उमेश कुमार शर्मा ने स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के मानव अधिकारों, जैसे भोजन, शुद्ध पेयजल, कूलर और पंखे जैसी बुनियादी सुविधाएं, बिस्तर की स्थिति, प्रयोगशाला सेवाएं, साफ-सफाई, शौचालयों की उपलब्धता, दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाएं और सेवा की समयबद्धता की जांच की। साथ ही उन्होंने यह भी जाना कि क्या महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य वंचित वर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं समान रूप से उपलब्ध हैं या नहीं।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि आयोग द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं का मूल्यांकन नागरिकों के स्वास्थ्य अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ वैलनेस गतिविधियां जैसे योग, प्राणायाम, उचित खानपान और स्वस्थ जीवनशैली को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे आमजन की जीवन गुणवत्ता बेहतर हो सके।

इस निरीक्षण से यह स्पष्ट है कि स्वास्थ्य संस्थाओं में दी जा रही सुविधाओं को मानव अधिकारों के मानकों पर कसौटी पर कसा जा रहा है और यह प्रक्रिया नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

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