संतोष चौबे ने किया यादगार पाठ मगर शेक्सपियर को याद रखना
भोपाल। वरिष्ठ कवि–कथाकार, विश्व रंग और रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे के नए कहानी संग्रह ‘ग़रीबनवाज़’ का लोकार्पण समारोह सोमवार को रवीन्द्र भवन के गौरांजनी सभागार में गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। यह आयोजन रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, वनमाली सृजन पीठ और स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में संतोष चौबे ने अपने कहानी संग्रह से मगर शेक्सपियर को याद रखना का उत्कृष्ट पाठ किया, जिसे उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने लंबे समय तक याद रखा। उन्होंने कहा कि कहानी की पठनीयता लेखक की सजगता से जुड़ी होती है। पाठक पहले ही वाक्य से कहानी में प्रवेश करे और उसे अंत तक बांधे रखना ही लेखक की सफलता है। मेरी कहानियों में दृश्यात्मकता और संवेदनशील इंटेनसिटी सबसे महत्वपूर्ण तत्व हैं।
समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकार मुकेश वर्मा (अध्यक्ष, वनमाली सृजन पीठ) ने की। उन्होंने कहा कि ग़रीबनवाज़ कहानियाँ जीवन के करुण पक्ष से हमारा परिचय कराती हैं। संतोष चौबे का कथा-संसार मनुष्य के भीतरी संवाद का दस्तावेज़ है।
मुख्य अतिथि कथाकार शशांक ने कहा कि चौबे जी की कहानियाँ सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदना और द्वंद्व से गहराई से जुड़ी हैं। उनके पात्र आम जन की संघर्षशीलता और उम्मीदों का प्रतीक हैं।
डॉ. उर्मिला शिरीष ने अपने वक्तव्य में कहा कि ग़रीबनवाज़’ में स्त्री–पुरुष संबंध, नैतिकता और सामाजिक असमानताएँ बेहद संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत की गई हैं।
रेखा कस्तवार, भालचंद्र जोशी, पंकज सुबीर, प्रज्ञा रोहिणी (दिल्ली) और अच्युतानंद मिश्र (केरल) सहित अनेक साहित्यकारों ने चौबे जी की कहानियों की प्रशंसा की।
प्रज्ञा रोहिणी ने कहा कि संतोष चौबे की कहानियाँ उत्तर आधुनिक युग की बड़ी खाइयों को पाटने का कार्य करती हैं, जबकि अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि उनकी रचनाओं में सामाजिक आलोचना और वैचारिक गहराई का विशिष्ट स्वर उपस्थित है।
अतिथियों का स्वागत ज्योति रघुवंशी (राष्ट्रीय संयोजक, वनमाली सृजन पीठ एवं प्रबंधक, आईसेक्ट पब्लिकेशन) ने किया। कार्यक्रम का संचालन कुणाल सिंह (संपादक, वनमाली कथा) ने किया।
इस अवसर पर डॉ. विजय बहादुर सिंह, डॉ. विनीता चौबे, डॉ. करुणा शंकर उपाध्याय, डॉ. नितिन वत्स, बलराम गुमास्ता, मेजर जनरल श्याम श्रीवास्तव, डॉ. रामवल्लभ आचार्य, नीलेश रघुवंशी, प्रज्ञा रावत सहित सैकड़ों वरिष्ठ एवं युवा रचनाकारों की रचनात्मक उपस्थिति रही।
कहानी संग्रह ‘ग़रीबनवाज़’ का लोकार्पण समारोह रवीन्द्र भवन में संपन्न
