
इटावा । उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में एक दर्दनाक घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। यहां प्रिया तिवारी नाम की युवती ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली, और उसकी मौत के पीछे जो कारण सामने आए हैं, वो समाज की संवेदनहीनता और व्यवस्था की लापरवाही की तस्वीर पेश करते हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रिया को रिजवान नामक युवक लंबे समय से परेशान कर रहा था। उसने प्रिया पर बार-बार दबाव बनाया कि वह उससे निकाह करके उसकी ‘बेगम’ बन जाए। प्रिया ने इस मानसिक उत्पीड़न की जानकारी अपने परिवार को दी, जिसके बाद परिजन स्थानीय थाने पहुंचे। लेकिन SHO मंसूर ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
पुलिस की उदासीनता और आरोपी की बढ़ती हिम्मत के चलते प्रिया लगातार मानसिक तनाव में रही। आखिरकार, इस प्रताड़ना और न्याय न मिलने की पीड़ा में उसने जहर खा लिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
प्रिया तिवारी की आत्महत्या ने समाज में बेटियों की सुरक्षा और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह घटना सिर्फ एक युवती की मौत नहीं, बल्कि एक पूरी व्यवस्था की विफलता का प्रमाण है।
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समाज को आत्ममंथन करने की जरूरत है — क्या हम अपनी बहनों और बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर पा रहे हैं? क्या अब इंसाफ सिर्फ कागज़ों में रह गया है?
बेटियों की सुरक्षा अब केवल कानून पर नहीं छोड़ी जा सकती। समाज और परिवार दोनों को जागरूक और सक्रिय होने की ज़रूरत है, ताकि कोई और प्रिया तिवारी इस तरह दम न तोड़े।





