बाराबंकी । उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से दहेज प्रथा की एक शर्मनाक तस्वीर और साथ ही इंसानियत की मिसाल सामने आई है। हैदरगढ़ क्षेत्र में स्विफ्ट कार की मांग पूरी न होने पर दूल्हे ने शादी से इंकार कर दिया, जिससे बारात मंडप से ही लौट गई। लेकिन इसी मंडप में एक ऐसा फैसला हुआ जिसने लड़की के पिता की इज्जत भी बचाई और समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया।
हैदरगढ़ क्षेत्र की रहने वाली मोहिनी की शादी विकास सोनी से तय हुई थी। शादी के सभी रस्मो-रिवाज रात भर खुशी-खुशी पूरे हुए। परंतु सुबह होते ही मामला बिगड़ गया। दूल्हा पक्ष ने अचानक दहेज में स्विफ्ट कार की मांग रख दी।
लड़की के पिता ने हाथ जोड़कर कहा कि अभी इतनी बड़ी व्यवस्था संभव नहीं है, उन्हें दो-तीन महीने का समय दे दिया जाए, कार जरूर दे दी जाएगी। लेकिन दूल्हा और उसके परिजन एक भी बात सुनने को तैयार नहीं हुए और बारात वापस लौट गई। इस घटना से लड़की के पिता गहरे सदमे में आ गए।
पिता की हालत देखकर मोहिनी ने साहस दिखाया और अपने प्रेमी शिवांश सोनी को फोन कर पूरी घटना बताई। उसने साफ शब्दों में कहा कि अगर वह उससे प्यार करता है तो आज ही मंडप में शादी करे, क्योंकि यह उसके पिता की इज्जत का सवाल है।
शिवांश अपने परिवार में इकलौता बेटा था। उसने अपने पिता को पूरी बात बताई। पहले पिता ने समाज और परिस्थितियों का हवाला देकर मना कर दिया, लेकिन मां ने बहादुरी दिखाते हुए हामी भर दी। इसके बाद उसी मंडप में पूरे विधि-विधान से मोहिनी और शिवांश की शादी संपन्न हुई।
समाज को संदेश:
एक ओर जहां दहेज के लालच में रिश्ता टूट गया, वहीं दूसरी ओर प्रेम, सम्मान और मानवीय मूल्यों ने एक नया रिश्ता जोड़ दिया। इस फैसले से एक पिता की इज्जत बची और एक मां को संस्कारी बहू मिल गई।
बाराबंकी में दहेज की भेंट चढ़ी शादी: स्विफ्ट कार की मांग पर लौटी बारात, प्रेमी ने मंडप में रचाई शादी
