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Ghaziabad | नवरात्रि पर सुर्खियां बटोरने वाली महिला दरोगा गिरफ्तार, एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई से मचा हड़कंप

गाजियाबाद । उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में नवरात्रों के पहले दिन बहादुरी की तस्वीरों से चर्चा में आई महिला थाने की टीम की दरोगा भुवनेश्वरी एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। इस बार मामला दहेज उत्पीड़न के केस में रिश्वत लेने का है। एंटी करप्शन टीम ने दरोगा को 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


नवरात्रि पर ‘एनकाउंटर’ से बनी थीं चर्चा का केंद्र

23 सितंबर, नवरात्रों के पहले दिन, गाजियाबाद में बदमाश को गोली मारने की घटना के बाद महिला थाने की टीम और दरोगा भुवनेश्वरी सुर्खियों में आ गई थीं।
सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें वायरल हुई थीं, जिनमें वह एक आरोपी को कंधे पर पकड़कर ले जाती नजर आ रही थीं। इसी कार्रवाई के बाद उन्हें सीपी (पुलिस कमिश्नर) द्वारा सम्मानित भी किया गया था, जिसे महिला सशक्तिकरण और पुलिस की बहादुरी के उदाहरण के रूप में प्रचारित किया गया।


एंटी करप्शन टीम की बड़ी कार्रवाई

अब ताजा मामले में एंटी करप्शन टीम ने भुवनेश्वरी को दहेज उत्पीड़न से जुड़े एक प्रकरण में रिश्वत मांगने और लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। सूत्रों के मुताबिक, शिकायतकर्ता से केस में राहत देने के बदले 45 हजार रुपये की मांग की गई थी। टीम ने जाल बिछाकर दरोगा को रंगे हाथों पकड़ लिया।

पहले भी विवादों में रह चुकी हैं भुवनेश्वरी

यह पहला मौका नहीं है जब दरोगा भुवनेश्वरी विवादों में आई हों। इससे पहले भी उनका नाम कानपुर में हनी ट्रैप और कथित सेक्स रैकेट से जुड़े मामले में सामने आ चुका है, जहां उन्हें गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में रही है, लेकिन बार-बार ऐसे गंभीर आरोपों का सामने आना विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया है।

पुलिस सिस्टम पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ऐसे विवादित और आरोपित अधिकारियों को फील्ड चार्ज कैसे दिया जाता है? क्या पुलिस विभाग में पृष्ठभूमि जांच और निगरानी व्यवस्था पर्याप्त है? और क्या सिर्फ एक चर्चित कार्रवाई के आधार पर सम्मान देना उचित है?

निष्कर्ष

गाजियाबाद की यह घटना केवल एक दरोगा की गिरफ्तारी का मामला नहीं है, बल्कि यह पुलिस व्यवस्था की जवाबदेही, पारदर्शिता और आंतरिक निगरानी पर भी सवाल उठाती है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि विभाग इस मामले में आगे क्या सख्त कदम उठाता है और क्या ऐसी घटनाओं से सबक लेकर सिस्टम में सुधार किया जाता है या नहीं।

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