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विश्व पुस्तक मेले में शब्दों का उत्सव: शुभदा बुक्स व पाखी प्रकाशन ने रचा साहित्यिक संगम

अंजली राय सहित कई साहित्यकारों की पुस्तकों का भव्य विमोचन

भोपाल। नई दिल्ली के भारत मंडपम, प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेले के लेखक मंच पर साहित्य और शब्दों का अनूठा उत्सव देखने को मिला। शुभदा बुक्स और पाखी प्रकाशन की ओर से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में छह प्रतिष्ठित एवं नवोदित लेखकों की पुस्तकों का भव्य विमोचन संपन्न हुआ। यह आयोजन साहित्य प्रेमियों के लिए प्रेरणा, संवेदना और रचनात्मकता से भरा एक अविस्मरणीय अवसर बन गया।

नवोदित और अनुभवी लेखकों का अनूठा संगम

इस साहित्यिक मंच की सबसे खास बात रही, नए और अनुभवी लेखकों का सुंदर समन्वय। कार्यक्रम में दो नवोदित लेखिकाओं अंजली राय और गुरप्रीत कौर की प्रथम कृतियों का विमोचन हुआ, जिसने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। वहीं, साहित्यकार मौसमी चंद्रा और दिनेश कुमार शर्मा ‘कौत्स’ की यह चौथी पुस्तक रही, जबकि वरिष्ठ लेखक रामपाल श्रीवास्तव की सातवीं–आठवीं कृतियों का लोकार्पण किया गया। एक ही मंच पर उभरते लेखकों की नई सोच और अनुभवी कलमकारों की सधी हुई अभिव्यक्ति का यह संगम साहित्यिक परंपरा की निरंतरता और समृद्धि का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।

अंजली राय के लिए भावनात्मक पल

11 जनवरी को आयोजित इस कार्यक्रम का हर क्षण लेखिका अंजली राय के लिए बेहद भावुक और प्रेरणादायी रहा। अपनी पहली पुस्तक को पाठकों के हाथों में देखना उनके लिए जीवन का अविस्मरणीय अनुभव साबित हुआ। किताबों की महक, बचपन की यादें, पिता से मिली लेखन की प्रेरणा और पाठकों का स्नेह—इन सबने मिलकर इस अवसर को और भी खास बना दिया। इस अवसर पर अंजली राय ने कहा “किताबें सिर्फ पढ़ने का माध्यम नहीं होतीं, वे हमें दुनिया को समझने और स्वयं से संवाद करने की दृष्टि देती हैं। शब्दों की यह यात्रा भरोसे और उम्मीद से भरी होती है। अगर हम किताबों का हाथ थामे रहें, तो यह सफर हमें कभी निराश नहीं करेगा।”

उन्होंने सभी लेखकों को बधाई देते हुए कहा कि यह आयोजन साहित्य के प्रति विश्वास और संवेदना को और अधिक सशक्त बनाने वाला सिद्ध हुआ है।

इन पुस्तकों का हुआ विमोचन

इस गरिमामय साहित्यिक समारोह में निम्नलिखित पुस्तकों का विमोचन किया गया, अंजली राय – “आधी जली रोटी आधी बची जिंदगी” (कविता संग्रह), दिनेश कुमार शर्मा ‘कौत्स’ – “बनी जिंदगी मधुशाला” (काव्य संग्रह), रामपाल श्रीवास्तव – “नट नारायण अखबी” (उपन्यास), डॉ. गीतू धवन – “धरती की कोई उम्मीद आखिरी नहीं” (कविता संग्रह), मौसमी चंद्रा – “सप्तपर्णी” (कहानी संग्रह), गुरप्रीत कौर – “अमरी” (कहानी संग्रह), साहित्य के प्रति बढ़ता विश्वास

कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों, पाठकों और प्रकाशन जगत के प्रतिनिधियों ने इस आयोजन को हिंदी साहित्य के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। शुभदा बुक्स और पाखी प्रकाशन के इस संयुक्त प्रयास ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि पुस्तकें केवल कागज के पन्ने नहीं, बल्कि विचारों, संवेदनाओं और अनुभवों का जीवंत संसार होती हैं।

विश्व पुस्तक मेले का यह आयोजन न केवल पुस्तकों का उत्सव बना, बल्कि साहित्यिक यात्रा को नई ऊर्जा और नई दिशा देने वाला प्रेरक क्षण भी साबित हुआ।

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