
भोपाल। उच्च शिक्षा में मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और समग्र कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से द भोपाल स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (बीएसएसएस), भोपाल में एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का आयोजन किया गया। यह एफडीपी “हैप्पीनेस में अनुभवात्मक अभ्यास” विषय पर केंद्रित रहा, जिसे जयपुरिया इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, इंदौर एवं बीएसएसएस भोपाल द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ जयपुरिया इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के प्रतिनिधि डॉ. शैलेश पांडे तथा बीएसएसएस के प्राचार्य फादर जॉन पीजे के स्वागत उद्बोधन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अपने संबोधन में वक्ताओं ने शिक्षकों के लिए मानसिक संतुलन, आत्म-संतोष और सकारात्मक दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि खुशहाल शिक्षक ही विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
एफडीपी के मुख्य वक्ता डॉ. नितिन मेरह रहे, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम को संवादात्मक और अनुभवात्मक स्वरूप प्रदान किया। उन्होंने माइंडफुलनेस आधारित तनाव न्यूनीकरण तकनीकों, ध्यान अभ्यास, आत्म-अवलोकन और समूह गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को सक्रिय रूप से जोड़ा। सत्रों के दौरान उन्होंने बताया कि हैप्पीनेस केवल बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होती, बल्कि यह व्यक्ति की सोच, भावनाओं और दैनिक आदतों से गहराई से जुड़ी होती है।
कार्यशाला में माइंडफुलनेस और भावनाएँ, सुख की व्यक्तिगत समझ, सामाजिक जुड़ाव, कृतज्ञता की भावना तथा सकारात्मक मानसिक आदतों के विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष फोकस किया गया। प्रतिभागियों ने अनुभवात्मक अभ्यासों के माध्यम से स्वयं के तनाव स्तर, भावनात्मक प्रतिक्रियाओं और जीवन में संतुलन की आवश्यकता को समझा।
इस कार्यक्रम में बीएसएसएस के मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. विनय मिश्रा ने दोनों संस्थानों के बीच समन्वयक की भूमिका निभाई और अकादमिक सहयोग को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम का समापन इंटरएक्टिव फीडबैक एवं रिफ्लेक्शन सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए।
एफडीपी ने यह स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा में अनुभवात्मक अधिगम और समग्र कल्याण आज की आवश्यकता है, और ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों को न केवल पेशेवर बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी सशक्त बनाते हैं।



