भोपाल, । मध्यप्रदेश के 30 से अधिक जिलों में लगभग 15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की बंपर फसल हुई है, लेकिन अब यह फसल सरकारी उपेक्षा और समर्थन मूल्य पर खरीदी न होने के कारण किसानों के लिए सिरदर्द बन गई है। किसानों को बाजार में 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक का घाटा उठाना पड़ रहा है। इससे आक्रोशित होकर भारतीय किसान संघ ने प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।
क्या है किसानों की प्रमुख समस्या?
मूंग और उड़द का सरकारी खरीदी केंद्रों पर MSP पर न होना।
MSP और बाजार मूल्य में भारी अंतर:
मूंग MSP (2025-26): ₹8,768 / क्विंटल | मंडी भाव: ₹6,200
उड़द MSP (2025-26): ₹7,800 / क्विंटल | मंडी भाव: ₹6,000
लगभग ₹2,000 प्रति क्विंटल तक का नुकसान, जिससे किसानों में भारी असंतोष है।
आंदोलन की चेतावनी: सैकड़ों तहसीलों में प्रदर्शन, अगला कदम सीएम हाउस घेराव!
भारतीय किसान संघ मध्यप्रदेश द्वारा प्रदेश की सैकड़ों तहसीलों में धरना प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से सरकार से समर्थन मूल्य पर मूंग और उड़द की खरीदी की मांग की जा रही है। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार केंद्र को प्रस्ताव नहीं भेजती है, तो भारतीय किसान संघ लाखों किसानों के साथ मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेगा।”
केंद्र सरकार की स्थिति: प्रस्ताव भेजे तो तुरंत मंजूरी
भारतीय किसान संघ के अनुसार, संगठन के केंद्रीय नेतृत्व ने देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा की है। मंत्री ने आश्वासन दिया है कि “यदि मध्यप्रदेश सरकार केंद्र को मूंग और उड़द की खरीदी हेतु प्रस्ताव भेजती है, तो केंद्र सरकार तत्क्षण स्वीकृति देने को तैयार है।” अब सारी ज़िम्मेदारी मध्यप्रदेश सरकार की है कि वह इस प्रस्ताव को संवेदनशीलता और तत्परता के साथ केंद्र को भेजे।
क्यों बढ़ी थी मूंग-उड़द की बुआई?
पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदी की अनुमति मिलने से किसानों में उत्साह और विश्वास जगा था। इस कारण दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में मूंग और उड़द की खेती का रकबा काफी बढ़ा। लेकिन इस वर्ष समर्थन मूल्य पर खरीदी न होने से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है — लागत भी गई और लाभ भी नहीं मिला।
भारतीय किसान संघ की मांग:
1. मध्यप्रदेश सरकार तत्काल केंद्र को खरीदी का प्रस्ताव भेजे।
2. शनिवार से समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू की जाए।
3. यदि ऐसा नहीं हुआ तो बड़ा जनांदोलन होगा।
विश्लेषण: MSP पर खरीदी न होना — आत्मनिर्भर भारत की राह में अड़चन?
जब केंद्र सरकार दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता की बात करती है, तब ऐसी परिस्थिति में किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य न मिलना नीति और नीयत दोनों पर सवाल खड़े करता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस तरह की अस्थिरता बनी रही तो आने वाले वर्षों में किसान फिर से मूंग-उड़द की खेती से दूरी बना लेंगे, जिससे आयात निर्भरता बढ़ेगी।
MP में मूंग-उड़द के समर्थन मूल्य पर नहीं हो रही खरीदी, किसान आंदोलित — सरकार को भेजा जाए तत्काल प्रस्ताव: भारतीय किसान संघ
