प्रांतव्यापी सम्मेलन व आंदोलन के अगले चरण की घोषणा 29 जून को
भोपाल, । मध्यप्रदेश मंत्रालय में पदस्थ सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मचारियों और अधिकारियों ने आज नवीन पदोन्नति नियम 2025 के विरोध में शांतिपूर्ण एवं प्रतीकात्मक ढंग से कार्य किया। कर्मचारियों ने “न्याय चाहिए” जैसे स्लोगनों से युक्त टोपियाँ पहनकर अपना विरोध दर्ज कराया।
26 जून (गुरुवार) को दोपहर 1:30 बजे, मंत्रालय वल्लभ भवन क्रमांक 01 के मुख्य द्वार पर संबंधित वर्गों के कर्मचारी शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन करेंगे। यह प्रदर्शन गुप्त नवरात्रि के प्रथम दिन प्रस्तावित है, जो सरकार के प्रति गंभीर असंतोष का संकेत है, साथ ही यह भी दर्शाता है कि विरोध धार्मिक या सामाजिक सौहार्द को बाधित किए बिना लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त किया जाएगा।
विवाद का मूल कारण: अवैध नियमों की पुनरावृत्ति
मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष इंजी. सुधीर नायक ने बताया कि वर्ष 2002 में लागू पदोन्नति नियमों को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया था, और इसके अंतर्गत हुए प्रमोशनों को रिवर्ट करने के निर्देश दिए थे। इसके पश्चात माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे, जिससे न तो आगे प्रमोशन हो सकता था और न ही पिछली पदोन्नतियाँ रद्द।
हालांकि, वर्ष 2025 में जारी नए पदोन्नति नियमों में पूर्व में असंवैधानिक ठहराए गए प्रावधानों को लगभग उसी रूप में फिर से शामिल किया गया है। कर्मचारी संघ का कहना है कि यह न केवल न्यायालय की भावना के विरुद्ध है, बल्कि सेवा क्षेत्र में असमानता और पक्षपात को भी बढ़ावा देता है।
प्रमुख आपत्तियाँ:
अवैध प्रमोशन पाए कर्मचारियों को फिर से प्रमोशन दिया जा रहा है।
आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को कृपांक की सुविधा दी जा रही है।
एक ही व्यक्ति दोनों प्रतीक्षा सूचियों (आरक्षित व अनारक्षित) में शामिल हो सकता है।
आरक्षित वर्ग का कर्मचारी सेवाकाल में बार-बार वर्ग बदल सकता है, जबकि अनारक्षित कर्मचारी को एक ही प्रमोशन भी मुश्किल से मिलता है।
इंजी. सुधीर नायक ने कहा:
> “हम आरक्षण के विरोधी नहीं हैं। भर्ती में और पदोन्नति में आरक्षण हो, लेकिन आरक्षित वर्ग के लोग अनारक्षित पदों पर दावा न करें। कुछ पद अनारक्षित वर्ग के लिए भी छोड़े जाएँ, ताकि संतुलन बना रहे।”
तथ्यात्मक स्थिति का उल्लेख:
वर्तमान में मंत्रालय में अवर सचिव के कुल 65 पदों में से 58 पद आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों के पास हैं। यह स्थिति अनारक्षित, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मचारियों में गहरी निराशा और हताशा का कारण बन रही है।
आंदोलन की रूपरेखा:
26 जून 2025: वल्लभ भवन क्रमांक 01 पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन
29 जून 2025: सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मचारियों का प्रांतीय सम्मेलन, जिसमें आंदोलन के अगले चरणों की घोषणा की जाएगी।
मंत्रालय वल्लभ भवन में कर्मचारियों ने नये पदोन्नति नियमों के विरोध में जताया प्रतीकात्मक आक्रोश
