श्योपुर, मध्य प्रदेश, । मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले से सामाजिक विभाजन और जातीय भेदभाव का शर्मनाक उदाहरण सामने आया है।
यहां धर्म के नाम पर एकजुटता की बातें करने वाले लोग जातीय भेदभाव में इतने गहरे बंटे हुए हैं कि एक दलित युवक के सम्मानजनक अंतिम संस्कार में भी बाधा डाली गई।
हादसे में हुई युवक की मौत, गांव लौटने पर शुरू हुआ विवाद
श्योपुर जिले के एक गांव के निवासी जाटव समुदाय के युवक की बेंगलुरु में प्राइवेट नौकरी के दौरान एक हादसे में मौत हो गई।
जब मृतक का पार्थिव शरीर गांव लाया गया और दाह संस्कार की तैयारी शुरू हुई, तो वहां मौजूद रावत समाज के लोगों ने विरोध कर दिया और अंतिम संस्कार को रोकने की कोशिश की।
सड़क पर शव रखकर हुआ प्रदर्शन
जातीय विवाद इतना बढ़ गया कि परिजनों और ग्रामीणों ने पार्थिव शरीर को सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
दलित समाज के लोगों ने सम्मानजनक अंतिम संस्कार के अधिकार की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई।
प्रशासन की दखल से हुआ अंतिम संस्कार
स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की।
काफी समझाइश और प्रयासों के बाद पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी गई और अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।
प्रशासन ने आश्वासन दिया कि इस प्रकार की जातीय घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
सामाजिक समरसता पर सवाल
यह घटना मध्य प्रदेश में जातीय भेदभाव की गहरी जड़ों को उजागर करती है।
जहां धर्म के नाम पर एकता की बातें होती हैं, वहीं जाति के आधार पर भेदभाव आज भी जिंदा है।
इस घटना ने एक बार फिर से सामाजिक समरसता, दलित अधिकार, और समानता के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।
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