1500 से ज्यादा भवनों में अब भी रह रहे लोग, बारिश से पहले सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
भोपाल, 3 जून। राजधानी भोपाल में जर्जर और खतरनाक भवनों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। नगर निगम द्वारा वर्षों से ऐसे भवनों की पहचान और नोटिस जारी किए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में जर्जर इमारतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है। स्थिति यह है कि शहर में लगभग दो हजार भवन ऐसे बताए जा रहे हैं, जो अत्यंत जर्जर श्रेणी में हैं और किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
विशेष चिंता की बात यह है कि इनमें से करीब 1500 से अधिक इमारतों में आज भी लोग निवास कर रहे हैं, जिससे बारिश के मौसम में जान-माल का खतरा बढ़ गया है।
हर वर्ष जारी होते हैं नोटिस, कार्रवाई सीमित
नगर निगम के अनुसार जर्जर भवनों की पहचान कर भवन मालिकों को नियमित रूप से नोटिस जारी किए जाते हैं। हालांकि अनेक मामलों में संपत्ति संबंधी विवाद और न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के कारण भवनों को हटाने या ध्वस्त करने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाती।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई इमारतें वर्षों से खतरनाक स्थिति में हैं, लेकिन उन्हें खाली कराने या सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।
सात दिन में भवन हटाने का प्रावधान
नगर पालिका निगम अधिनियम 1954 की धारा 310 के तहत किसी भवन को जर्जर और खतरनाक घोषित किए जाने के बाद उसके मालिक को निर्धारित अवधि में भवन हटाने या ध्वस्त करने का नोटिस दिया जाता है। नियमों के अनुसार ऐसे भवनों को समय रहते हटाया जाना चाहिए ताकि किसी संभावित हादसे को रोका जा सके।
बताया जाता है कि पूर्व वर्षों में बड़ी संख्या में भवन मालिकों को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अधिकांश मामलों में कार्रवाई कागजी प्रक्रिया तक ही सीमित रह गई।
पुराने शहर में सबसे अधिक खतरा
शहर के पुराने क्षेत्रों में जर्जर भवनों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक बताई जाती है। शाहजहानाबाद, जहांगीराबाद, चौकी इमामबाड़ा, हमीदिया रोड, जुमेराती, चौक बाजार, इब्राहिमपुरा, पीरगेट, इमामी गेट, इकबाल मैदान, कोटरा सुल्तानाबाद, जवाहर चौक और बाणगंगा जैसे क्षेत्रों में कई पुरानी इमारतें आज भी खड़ी हैं।
इनमें से अनेक भवन 40 से 100 वर्ष पुराने बताए जाते हैं और समय के साथ उनकी संरचनात्मक मजबूती कमजोर हो चुकी है। इसके अलावा बरखेड़ा पठानी, सिविल लाइन, इंद्रपुरी और कोटरा जैसे क्षेत्रों में भी पुराने आवासीय निर्माण मौजूद हैं।
बारिश के मौसम में बढ़ जाती है चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार वर्षा, सीलन और रखरखाव की कमी के कारण जर्जर भवनों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। हर वर्ष मानसून के दौरान ऐसे भवनों से जुड़ी घटनाएं सामने आती हैं, जिससे लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ जाती है।
नागरिकों ने नगर निगम और प्रशासन से मांग की है कि मानसून शुरू होने से पहले अत्यंत खतरनाक भवनों का सर्वे कर आवश्यक कार्रवाई की जाए तथा प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
व्यापक सर्वे और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता
शहरी विशेषज्ञों का मानना है कि जर्जर भवनों की समस्या केवल पुराने शहर तक सीमित नहीं है। तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार के बीच भवनों की नियमित संरचनात्मक जांच, समयबद्ध मरम्मत और जोखिम वाले निर्माणों पर कार्रवाई आवश्यक है। इससे संभावित हादसों को रोका जा सकता है और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
भोपाल में जर्जर भवन बने खतरा, कार्रवाई के इंतजार में दो हजार से अधिक इमारतें
