गुना के हिलगना में सरकारी चरनोई जमीन की खरीद-फरोख्त के आरोप, रिकॉर्ड की जांच की मांग

जिल्द-बंदोबस्त में सर्वे नंबर 90 की जमीन शासकीय चरनोई दर्ज होने का दावा, प्लॉटिंग कर बिक्री की शिकायत

गुना। जिले के ग्राम हिलगना में शासकीय भूमि की खरीद-फरोख्त और उसके बाद प्लॉटिंग किए जाने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय सूत्रों और उपलब्ध बताए जा रहे राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर कुछ जमीन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि जिन भूमि खसरों को पुराने जिल्द-बंदोबस्त रिकॉर्ड में शासकीय चरनोई भूमि बताया गया है, उनकी खरीद-फरोख्त और नामांतरण की प्रक्रिया हुई।

मामले में प्रशासन से पुराने और वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड का मिलान कर जमीन के वास्तविक स्वामित्व और उपयोग की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही है।

सर्वे नंबर 90 की जमीन को लेकर सवाल

मिली जानकारी के अनुसार ग्राम हिलगना तहसील गुना की सर्वे नंबर 90/1/2 मिन, 90/1/1 और 90/1/2 मिन से संबंधित कुल करीब 3.151 हेक्टेयर भूमि को लेकर विवाद है। दावा है कि संबंधित भूमि पट्टा भूमि के रूप में दर्ज थी और आवश्यक अनुमति के बिना उसके हस्तांतरण की प्रक्रिया की गई।

आरोप यह भी है कि जमीन खरीदने वाले कुछ लोगों ने आगे इसे अन्य व्यक्तियों को बेच दिया और इन लेन-देन का पंजीयन होता रहा। बाद में तहसील रिकॉर्ड में नामांतरण किए जाने के दावे भी सामने आए हैं।

हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए संबंधित वर्षों के मूल राजस्व रिकॉर्ड, पंजीयन दस्तावेज और नामांतरण आदेशों की जांच आवश्यक है।

जिल्द-बंदोबस्त में चरनोई दर्ज होने का दावा

मामले में सबसे महत्वपूर्ण दावा यह है कि सर्वे नंबर 90 से संबंधित करीब 61 बीघा भूमि जिल्द-बंदोबस्त में शासकीय चरनोई के रूप में दर्ज बताई जा रही है।

इसके अलावा सर्वे नंबर 99/2/1, रकबा करीब 3.564 हेक्टेयर, को भी जिल्द-बंदोबस्त रिकॉर्ड में शासकीय पठार भूमि बताया जा रहा है। संबंधित पक्षों का कहना है कि यदि ये जमीनें वास्तव में शासकीय श्रेणी में दर्ज हैं तो इनके निजी व्यक्तियों के नाम हस्तांतरण और बाद में प्लॉटिंग की प्रक्रिया की जांच जरूरी है।

पुराने और वर्तमान रिकॉर्ड का मिलान जरूरी

मामले में प्रशासन से मांग की गई है कि जिल्द-बंदोबस्त, वर्तमान खसरा, नामांतरण रिकॉर्ड, पंजीयन दस्तावेज और मौके की स्थिति का मिलान कराया जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि संबंधित भूमि पर किसी प्रकार की प्लॉटिंग, निर्माण या अन्य व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति दी गई है या नहीं।

यदि जांच में सरकारी चरनोई या अन्य शासकीय भूमि के निजी हस्तांतरण की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

प्लॉट खरीदने वालों को सावधानी की जरूरत

इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने जमीन खरीदने वालों से सावधानी बरतने की अपील की है। किसी भी प्लॉट या जमीन को खरीदने से पहले खसरा, नक्शा, स्वामित्व रिकॉर्ड, जिल्द-बंदोबस्त रिकॉर्ड, नामांतरण और बिक्री की वैध अनुमति की जांच करना जरूरी है।

विशेषज्ञ स्तर पर दस्तावेजों की जांच के बिना किसी जमीन को सरकारी, पट्टा या निजी बताना उचित नहीं होगा। इसलिए हिलगना की विवादित भूमि की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और प्रमाणित राजस्व दस्तावेजों से ही स्पष्ट हो सकेगी।

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