गुजरात में कांग्रेस का बड़ा संगठनात्मक कदम: डीसीसी अध्यक्षों की नियुक्ति पूरी, 2027 चुनाव की तैयारी तेज

नई दिल्ली/अहमदाबाद। कांग्रेस पार्टी ने गुजरात में जिला और शहर कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) के अध्यक्षों की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से मंजूरी दे दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा स्वीकृत यह निर्णय पार्टी के “संगठन सृजन अभियान” के अंतर्गत एक कठोर संगठनात्मक कवायद के समापन को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर पार्टी को पुनर्गठित करना और आगामी 2027 विधानसभा चुनावों के लिए रणनीतिक रूप से तैयार करना है।

पारदर्शी और समावेशी चयन प्रक्रिया

यह अभियान पारदर्शिता, वैचारिक प्रतिबद्धता और कार्यकर्ताओं की भागीदारी जैसे सिद्धांतों पर आधारित रहा। 12 अप्रैल, 2025 को, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने गुजरात के सभी जिलों में 43 पर्यवेक्षकों की तैनाती की थी। इसके अतिरिक्त, प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के 183 पर्यवेक्षकों को भी नियुक्त किया गया था। ये सभी पर्यवेक्षक – जिनमें राज्य प्रभारी, सांसद, विधायक, पूर्व PCC अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता शामिल थे – ने संगठनात्मक आकलन के लिए पूरे राज्य का दौरा किया।

व्यापक फील्ड विजिट और संवाद

AICC और PCC पर्यवेक्षकों ने मिलकर गुजरात के 26 लोकसभा क्षेत्रों, 182 विधानसभा क्षेत्रों और लगभग 235 ब्लॉक कांग्रेस समितियों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय कार्यकर्ताओं, नागरिक समाज, सामाजिक संगठनों और मीडिया के साथ खुला संवाद स्थापित किया। इस प्रक्रिया में आमने-सामने की बैठकें, जनसुनवाइयाँ और प्रेस कॉन्फ्रेंस शामिल रहीं, जिससे संगठन की जमीनी हकीकत को समझने में मदद मिली।

सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष जोर

नवनियुक्त डीसीसी अध्यक्ष न केवल गुजरात की सामाजिक और क्षेत्रीय विविधता का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। पार्टी ने नेतृत्व चयन में जमीनी जुड़ाव, वैचारिक स्पष्टता और संगठनात्मक क्षमता जैसे मापदंडों को प्राथमिकता दी है।

2027 की तैयारी की ठोस बुनियाद

इस संगठनात्मक पहल की निगरानी स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा की गई। यह कवायद 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की तैयारी का स्पष्ट संकेत है। पार्टी का मानना है कि बूथ स्तर से लेकर जिला और राज्य स्तर तक एक मजबूत और प्रतिबद्ध संगठन ही सत्ता परिवर्तन का माध्यम बन सकता है।

निष्कर्ष

गुजरात में कांग्रेस का यह संगठनात्मक अभ्यास न केवल आंतरिक लोकतंत्र और पारदर्शिता की मिसाल पेश करता है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि पार्टी अब गंभीरता से राज्य में अपनी खोई हुई जमीन को फिर से पाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में आगामी महीनों में कांग्रेस की गतिविधियाँ और रणनीतियाँ राजनीतिक विश्लेषकों की निगाह में रहेंगी।

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