Bhopal Municipal Corporation के नवीन मुख्यालय भवन में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को आधुनिक और नागरिक-अनुकूल बनाने का दावा किया गया था, लेकिन जमीनी स्थिति कुछ और कहानी बयां कर रही है। राजधानी भोपाल में जन्म-मृत्यु पंजीयन और विवाह पंजीयन जैसे संवेदनशील एवं नागरिक सेवाओं से जुड़े दो अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को एक ही चेंबर में बैठाकर काम कराया जा रहा है। इसका असर सीधे उन नागरिकों पर पड़ रहा है जो प्रतिदिन अपने जरूरी दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रियाओं के लिए निगम मुख्यालय पहुंचते हैं।
यह मामला केवल बैठने की व्यवस्था का नहीं, बल्कि शहरी प्रशासन की प्राथमिकताओं और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ा बड़ा प्रश्न बनता जा रहा है।
रोज 500 से अधिक नागरिकों की आवाजाही, फिर भी साझा चेंबर
नगर निगम के जन्म एवं मृत्यु पंजीयन विभाग में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। जन्म प्रमाण पत्र में नाम सुधार, मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने, रिकॉर्ड अपडेट, कानूनी दस्तावेजों के सत्यापन और अन्य प्रक्रियाओं के कारण यहां लगातार भीड़ बनी रहती है। दूसरी ओर विवाह पंजीयन भी संवेदनशील कानूनी प्रक्रिया है, जहां दंपत्तियों, अधिवक्ताओं और गवाहों की उपस्थिति आवश्यक होती है।
सूत्रों के अनुसार दोनों शाखाओं में प्रतिदिन 500 से अधिक नागरिकों की आवाजाही होती है। ऐसे में दोनों रजिस्ट्रारों को एक ही कक्ष में बैठाने से न केवल कामकाज प्रभावित हो रहा है बल्कि गोपनीयता, दस्तावेज सत्यापन और शिकायत सुनवाई जैसी प्रक्रियाओं में भी दिक्कतें आ रही हैं।
कई नागरिकों का कहना है कि एक साथ कई लोगों की मौजूदगी और लगातार होने वाली बातचीत के कारण अधिकारियों को समस्याएं समझने में परेशानी होती है। कई बार नागरिकों को लंबा इंतजार करना पड़ता है और निजी जानकारी सार्वजनिक माहौल में साझा करनी पड़ती है।
नया भवन, लेकिन पुरानी समस्याओं से भी बदतर व्यवस्था
दिलचस्प तथ्य यह है कि पुराने कार्यालयों में दोनों विभाग अलग-अलग स्थानों से संचालित होते थे। विवाह पंजीयन का कार्यालय माता मंदिर क्षेत्र में था, जबकि जन्म-मृत्यु पंजीयन शाखा आईएसबीटी स्थित कार्यालय से संचालित होती थी। वहां दोनों विभागों के अलग चेंबर होने के कारण कार्य अपेक्षाकृत व्यवस्थित तरीके से होता था।
लेकिन नए मुख्यालय भवन में पर्याप्त स्थान उपलब्ध होने के बावजूद दोनों शाखाओं को एक कमरे में समेट देना कई सवाल खड़े करता है। निगम मुख्यालय की प्रत्येक मंजिल पर पर्याप्त केबिन और कार्यालय कक्ष मौजूद हैं, फिर भी नागरिक सेवाओं से जुड़े विभागों को प्राथमिकता नहीं मिलना प्रशासनिक योजना पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
नागरिक सेवाओं में ‘स्पेस मैनेजमेंट’ क्यों महत्वपूर्ण?
शहरी प्रशासन विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी नगर निगम में नागरिक सेवा विभागों की संरचना केवल फर्नीचर या बैठने की व्यवस्था का मामला नहीं होती। यह “सर्विस डिलीवरी मॉडल” का हिस्सा होती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जन्म, मृत्यु और विवाह पंजीयन जैसे विभागों में तीन चीजें अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं:
गोपनीयता (Privacy)
दस्तावेज सत्यापन की शुद्धता
तेज और व्यवस्थित सार्वजनिक सुनवाई
यदि भीड़भाड़ वाले साझा कक्ष में अलग-अलग प्रकृति के मामलों की सुनवाई होगी तो त्रुटियों की संभावना बढ़ जाती है। खासकर जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज भविष्य में संपत्ति, पेंशन, बीमा, पासपोर्ट और कानूनी मामलों में उपयोग होते हैं। ऐसे में प्रशासनिक चूक का असर वर्षों तक नागरिकों को भुगतना पड़ सकता है।
‘समग्र’ शाखा को प्राथमिकता, नागरिक पंजीयन पीछे?
नगर निगम के भीतर यह चर्चा भी है कि पंजीयन शाखा क्षेत्र में उपलब्ध एक अलग केबिन को रजिस्ट्रारों को देने के बजाय समग्र विस्तार अधिकारी को आवंटित कर दिया गया है। जबकि समग्र आईडी से जुड़े अधिकांश कार्य वार्ड और जोन स्तर पर संपन्न होते हैं और उनका प्रत्यक्ष संचालन मुख्यालय से नहीं होता।
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यदि वास्तव में स्थान की कमी नहीं है, तो नागरिक सेवाओं से जुड़े विभागों को प्राथमिकता देना अधिक तार्किक निर्णय होता। इससे न केवल कामकाज सुचारु होता बल्कि जनता की शिकायतें भी कम होतीं।
डिजिटल इंडिया के दौर में बुनियादी सुविधाओं की कमी
मध्यप्रदेश सरकार और शहरी प्रशासन लगातार ई-गवर्नेंस, डिजिटल रिकॉर्ड और स्मार्ट सिटी मॉडल की बात करते रहे हैं। Smart Cities Mission के अंतर्गत भोपाल में करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट भी लागू किए गए हैं। इसके बावजूद यदि नागरिकों को मूलभूत प्रशासनिक सुविधाएं—जैसे व्यवस्थित काउंटर, अलग परामर्श कक्ष और सुनवाई का शांत वातावरण—नहीं मिल पा रहा, तो यह स्मार्ट प्रशासन की अवधारणा पर गंभीर सवाल उठाता है।
आगे क्या हो सकता है?
यदि नगर निगम प्रशासन इस व्यवस्था की समीक्षा करता है तो निम्न सुधार तुरंत लागू किए जा सकते हैं:
जन्म-मृत्यु और विवाह पंजीयन शाखाओं के लिए अलग कक्ष
टोकन आधारित डिजिटल कतार व्यवस्था
वरिष्ठ नागरिक और महिलाओं के लिए अलग सहायता डेस्क
दस्तावेज सत्यापन हेतु गोपनीय काउंटर
ऑनलाइन अपॉइंटमेंट आधारित सुनवाई प्रणाली
विशेषज्ञों का मानना है कि नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता केवल बड़े भवनों से नहीं, बल्कि छोटे प्रशासनिक निर्णयों से तय होती है। भोपाल नगर निगम के नए मुख्यालय में यह मामला अब “स्पेस एलोकेशन” से आगे बढ़कर नागरिक सुविधा और प्रशासनिक संवेदनशीलता की परीक्षा बनता जा रहा है।
भोपाल नगर निगम के नए मुख्यालय में अव्यवस्था? जन्म-मृत्यु और विवाह पंजीयन एक ही चेंबर में, रोजाना सैकड़ों नागरिक हो रहे परेशान
