ममता सरकार को फटकार, राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं स्वीकार
कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी के लिए आवश्यक भूमि हस्तांतरण में देरी को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार की कड़ी आलोचना की है। अदालत ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का गंभीर मामला बताते हुए साफ चेतावनी दी कि अब किसी भी प्रकार की लापरवाही या बाधा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
2,216 किमी लंबी सीमा, 600 किमी अब भी खुली
भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई 2,216 किलोमीटर है, जिसमें से लगभग 600 किलोमीटर अभी भी बाड़रहित और संवेदनशील है। यह क्षेत्र अवैध घुसपैठ, मानव तस्करी, मवेशी तस्करी और नकली मुद्रा रैकेट के लिए सबसे सक्रिय मार्गों में माना जाता है। केंद्र सरकार, BSF और विभिन्न एजेंसियाँ लंबे समय से राज्य से ज़मीन उपलब्ध करवाने की मांग कर रही थीं, ताकि बाड़बंदी कार्य तेजी से पूरा किया जा सके।
हाईकोर्ट ने दी अंतिम चेतावनी
हाईकोर्ट ने ममता सरकार को निर्देश दिया कि वह अगले सप्ताह तक पूरी रिपोर्ट दाखिल करे, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि ज़मीन अधिग्रहण में देरी क्यों हो रही है और आगे की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी। अदालत ने कहा कि यह मुद्दा केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सीधे-सीधे देश की सुरक्षा से जुड़ा है।
ममता की रुकावट उजागर : विपक्ष
इस मामले के बाद विपक्ष का कहना है कि ज़मीन रोके जाने से सरकार का तुष्टिकरण मॉडल खुलकर सामने आ गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि बांग्लादेशी घुसपैठ को रोकने की बजाय ममता सरकार प्रशासनिक बाधाएँ खड़ी कर रही है। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब राज्य सरकार के सामने सीमाई सुरक्षा को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती खड़ी हो गई है। देश की सुरक्षा पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा, यह संदेश अदालत ने बेहद स्पष्ट कर दिया है।
बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी में देरी पर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त
