ब्रेकिंग न्यूज़ : भोपाल के गौतम नगर में शादीशुदा महिला द्वारा 17-वर्षीय लड़के के अपहरण व अवैध संबंध के आरोप, परिवार ने पुलिस पर पक्षपात व लापरवाही का लगाया दावा।


गौतम नगर कांड: 28 वर्षीय महिला पर नाबालिग के अपहरण-शोषण का आरोप, पुलिस पर पक्षपात का शक




भोपाल । थाना गौतम नगर में 28 वर्षीय महिला पर नाबालिग से अवैध संबंध और अपहरण का गंभीर आरोप, पुलिस पर पक्षपात का शक
हनुमान मंदिर, नारियलखेड़ा निवासी खुशबू कुशवाह ने पुलिस अधीक्षक (शाहजहाँनाबाद) को लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया है कि माधवी अवस्थी (उम्र 28, शादीशुदा) ने उनके नाबालिग भाई रामकेश (उम्र 17) को बहला-फुसलाकर अपहरण कर लिया। खुशबू के मुताबि माधवी और रामकेश एक ही दुकान पर काम करते थे; धीरे-धीरे महिला ने प्रेम व विवाह का दबाव बनाया। परिजनों ने विरोध किया तो माधवी, अपने भाई अतुल तिवारी (पुलिस अधिकारी) के साथ घर आई और मारपीट की, पर थाना स्तर पर कोई FIR दर्ज नहीं हुई। 30 जून 2025 की शाम थाना गौतम नगर में बुलाने के बाद पुलिस ने ही रामकेश को माधवी के पास भेजा, जिसके बाद से वह लापता है। परिवार का दावा है कि महिला नाबालिग पर गुटखा-शराब जैसी आदतों का दबाव बना रही थी।


“तीन महीने से काट रहे थाने के चक्कर, फिर भी सुनवाई नहीं”

खुशबू कुशवाह का आरोप है कि थाने के अधिकारियों ने पहले OTP आधारित शिकायत (181) को दो बार बंद कर दिया। 1 जुलाई 2025 को रात 4 बजे सूचना देने के बाद भी रिपोर्ट सुबह 5 घंटे देर से सिर्फ ‘अपहरण’ के बिंदु पर लिखी गई।  IO भगवती शर्मा और शैलेन्द्र सिंह चंदेल ने “कार्यवाही नहीं होगी” कहते हुए परिवार को लौटा दिया।पुलिस पर भरोसा टूटता दिख रहा है; हम तीन महीने से न्याय की गुहार लगा रहे हैं पर महिला-पक्ष में एकतरफा कार्यवाही हो रही है।” —खुशबू


पुलिस पर पक्षपात की आशंकाएँ क्यों?

महिला-पुलिस मिलीभगत माधवी का भाई अतुल तिवारी स्वयं पुलिस अधिकारी बताया जा रहा है। अपहरण के बाद कॉल डिटेल नहीं खंगाली गई CDR विश्लेषण व लोकेशन-ट्रैक की माँग अनदेखी नाबालिग से बयान नहीं POCSO लागू होने के बावजूद मजिस्ट्रेटी बयान लंबित है।  सोशल मीडिया वीडियो मारपीट व धमकी का कथित क्लिप वायरल, पर FIR में धारा नहीं

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से उठा हड़कंप

घटना का एक कथित वीडियो वायरल हो चुका है जिसमें महिला और उसका भाई अभद्र भाषा का प्रयोग करते दिख रहे हैं। #JusticeForRamkesh ट्रेंड कर रहा है और स्थानीय संगठनों ने गौतम नगर थाने घेराव की चेतावनी दी है।


कानूनी विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

POCSO Act, 2012 के तहत 18 से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति के साथ यौन दुर्व्यवहार संगीन अपराध है; पुलिस को धारा 376, 363A सहित कड़ा प्रकरण दर्ज करना चाहिए।

CrPC Sec. 154(3) वेबसाइट पर ई-शिकायत बंद करना अधिकारों का हनन माना जा सकता है।

पीड़ित पक्ष मैडमेज़ (महिला एवं बाल विकास विभाग) या NCPCR में शिकायत कर त्वरित जांच की माँग कर सकता है।

आगे क्या? पाँच माँगें

1. POCSO व अपहरण की धारा जोड़कर तुरंत गैर-जमानती वारंट।
2. कॉल-डिटेल रिकॉर्ड व मोबाइल लोकेशन से नाबालिग का पता लगाना।
3. कथित पुलिसकर्मी अतुल तिवारी की भूमिका पर विभागीय जांच।
4. वायरल वीडियो को इलेक्ट्रॉनिक सबूत मानकर FSL सत्यापन।
5. पीड़ित परिवार को विटनेस प्रोटेक्शन व मनो-परामर्श सेवा उपलब्ध कराना।

निष्कर्ष गौतम नगर कांड ने एक बार फिर “महिला और पुलिसकर्मी की मिलीभगत?” जैसे सवालों को हवा दे दी है। क्या नाबालिग को न्याय मिलेगा या सिस्टम की अनदेखी उसकी आवाज दबा देगी? भोपाल पुलिस के लिए यह भरोसे की परीक्षा है। पीड़ित परिवार अब मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग व उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है।

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