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ग्वालियर से बड़ी खबर: DSP हिना खान की शादी में फरार घोषित मकरंद बौद्ध को निमंत्रण, पुलिस कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन, न्यायिक प्रक्रिया और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिस मकरंद बौद्ध को अदालत द्वारा फरार घोषित किया जा चुका था, उसी व्यक्ति को एक वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी की शादी में न केवल निमंत्रण दिया गया, बल्कि सार्वजनिक मंच पर पुलिस अधिकारियों द्वारा सम्मानित भी किया गया। इसके बाद उसी फरार बताए गए व्यक्ति की शिकायत पर एक सामाजिक कार्यकर्ता अनिल मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज की गई।

मंदिर आयोजन से रोकने का पुराना विवाद
बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले ही DSP हिना खान ने ग्वालियर के एक मंदिर में प्रस्तावित धार्मिक आयोजन को रोक दिया था, जिसमें अनिल मिश्रा प्रमुख भूमिका में थे। उस समय प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर पहले ही सवाल उठने लगे थे और इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखा गया था।

शादी में दिखे फरार घोषित मकरंद बौद्ध
अब सामने आए नए आरोपों के अनुसार, वही DSP हिना खान अपनी शादी के समारोह में मकरंद बौद्ध को आमंत्रित करती हैं। यह वही मकरंद बौद्ध बताया जा रहा है, जिसे न्यायालय द्वारा फरार घोषित किया गया था। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो में कथित तौर पर मकरंद बौद्ध को न केवल शादी समारोह में मौजूद देखा गया, बल्कि कुछ कार्यक्रमों में पुलिस अधिकारियों द्वारा सम्मानित करते हुए भी दिखाया गया।

सम्मान के बाद दर्ज हुई FIR
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस व्यक्ति को फरार घोषित किया गया था, वह खुलेआम सार्वजनिक कार्यक्रमों में कैसे शामिल हो सकता है। आरोप यह भी है कि इसी मकरंद बौद्ध की शिकायत पर बाद में अनिल मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई। इससे यह आशंका गहराती है कि क्या कानून सभी के लिए समान रूप से लागू हो रहा है।

कानून व्यवस्था पर उठते सवाल
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति वास्तव में फरार घोषित है, तो उसका सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होना और पुलिस अधिकारियों द्वारा सम्मानित किया जाना बेहद गंभीर मामला है। यह न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना जैसा भी प्रतीत होता है।

प्रशासन की चुप्पी और जनआक्रोश
इस पूरे मामले पर अब तक प्रशासन या संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। वहीं, सोशल मीडिया पर लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या ग्वालियर में कानून चुनिंदा लोगों के लिए अलग-अलग तरीके से लागू किया जा रहा है।

जांच की मांग तेज
इस प्रकरण के सामने आने के बाद निष्पक्ष जांच, FIR की वैधता की समीक्षा और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग तेज हो गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस “बड़े खुलासे” पर क्या कदम उठाता है और क्या जनता को स्पष्ट जवाब मिल पाता है या नहीं।

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