State

पालघर में बुलेट ट्रेन परियोजना की बड़ी उपलब्धि: पहली पर्वतीय सुरंग का निर्माण पूरा, मुंबई–अहमदाबाद दूरी 1 घंटा 58 मिनट में

भोपाल। मुंबई–अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना ने एक और अहम मील का पत्थर हासिल कर लिया है। केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि महाराष्ट्र के पालघर जिले में बुलेट ट्रेन परियोजना की पहली पर्वतीय सुरंग का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह उपलब्धि न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि देश के परिवहन बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

पालघर की MT-5 सुरंग: तकनीक और सुरक्षा का उदाहरण
पालघर जिले में विरार और बोइसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच स्थित लगभग 1.5 किलोमीटर लंबी पर्वतीय सुरंग (MT-5) राज्य की सबसे लंबी सुरंगों में से एक है। इस सुरंग की खुदाई दोनों सिरों से अत्याधुनिक ड्रिल और ब्लास्ट तकनीक के जरिए की गई, जिसे मात्र 18 महीनों में पूरा किया गया। निर्माण के दौरान जमीन की स्थिति की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की गई और शॉटक्रेट, रॉक बोल्ट व लैटिस गर्डर जैसी आधुनिक सहायक प्रणालियों का उपयोग किया गया। सुरक्षा के लिए वेंटिलेशन, अग्नि सुरक्षा और सुरक्षित प्रवेश-निकास की सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं।

परियोजना में सुरंगों की स्थिति
इससे पहले सितंबर 2025 में ठाणे और बीकेसी के बीच लगभग 5 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग पूरी की जा चुकी है। MAHSR परियोजना की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है, जिसमें 27.4 किलोमीटर सुरंगें शामिल हैं। इनमें 21 किलोमीटर भूमिगत और 6.4 किलोमीटर सतही सुरंगें हैं। परियोजना में कुल 8 पर्वतीय सुरंगें हैं, जिनमें से 7 महाराष्ट्र (लगभग 6.05 किमी) और 1 गुजरात में स्थित है।

मध्यम वर्ग के लिए किफायती और तेज यात्रा
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना से मध्यम वर्ग के लिए किफायती, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा संभव होगी। परियोजना पूरी होने के बाद मुंबई से अहमदाबाद की दूरी मात्र 1 घंटा 58 मिनट में तय की जा सकेगी, जिससे दोनों शहरों के बीच व्यापार, उद्योग और सेवाओं का तेज एकीकरण होगा।

रोजगार, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को लाभ
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि परियोजना के निर्माण चरण में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हो रहा है और संचालन के दौरान भी नए अवसर पैदा होंगे। कॉरिडोर के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों, ज्ञान के आदान-प्रदान और नए औद्योगिक व आईटी हब के विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, परियोजना के पूरा होने पर सड़क परिवहन की तुलना में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 95 प्रतिशत कमी आने का अनुमान है।

प्रमुख शहरों को जोड़ेगा कॉरिडोर
यह हाई स्पीड रेल कॉरिडोर साबरमती, अहमदाबाद, आनंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोइसर, विरार, ठाणे और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ेगा।

निष्कर्ष:
पालघर में पहली पर्वतीय सुरंग का पूरा होना बुलेट ट्रेन परियोजना की गति और क्षमता का प्रमाण है। यह परियोजना भारत के आधुनिक, हरित और तेज़ परिवहन भविष्य की नींव रखती है, जो यात्रा समय घटाने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था और पर्यावरण—दोनों को मजबूती देगी।

Related Articles