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भगत सिंह के राजगुरु, सुखदेव ने कांग्रेस की सरकार के खिलाफ असेंबली बम फेंका था :  सीएम रेखा गुप्ता


Big Breaking: भगत सिंह पर बयान को लेकर CM रेखा गुप्ता विवादों में

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया, इतिहास को लेकर उठे सवाल

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अपने एक सार्वजनिक बयान को लेकर विवादों में घिर गई हैं। मामला शहीद-ए-आजम भगत सिंह के ऐतिहासिक योगदान से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और बयानों के अनुसार, सीएम रेखा गुप्ता ने भगत सिंह के राजगुरु, सुखदेव ने कांग्रेस की सरकार के खिलाफ असेंबली में  संघर्ष को आज़ादी के बाद की राजनीति से  बंब फेंका है उस क्रांति का बिगुल भी सुना है । इस वक्तव्य के बाद  जनता की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

क्या है पूरा विवाद?

आरोप है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह संकेत दिया कि भगत सिंह ने आज़ादी के बाद कांग्रेस के विरोध में बम फेंका था, जबकि ऐतिहासिक तथ्य इसके बिल्कुल विपरीत हैं।
इतिहास के अनुसार, शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ब्रिटिश शासन के खिलाफ आज़ादी से पहले के क्रांतिकारी थे।

ऐतिहासिक तथ्य क्या कहते हैं?

इतिहास की पुस्तकों और दस्तावेजों के मुताबिक 8 अप्रैल 1929 को सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली (दिल्ली) मेंब्रिटिश सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए
भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने प्रतीकात्मक बम फेंका था।इसका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि बहरों को सुनाने के लिए धमाका ज़रूरी है का संदेश देना था।इसके बाद भगत सिंह ने स्वयं गिरफ्तारी दी और अंततः 23 मार्च 1931 को अंग्रेज़ी हुकूमत ने उन्हें फांसी दे दी।

सोशल मीडिया पर उबाल

सीएम के कथित बयान के बाद इतिहासकारों, शिक्षकों, छात्रों और आम नागरिकों ने सोशल मीडिया पर नाराज़गी जताई। कई यूज़र्स ने लिखा कि जो इतिहास स्कूल के बच्चे जानते हैं, वह देश के मुख्यमंत्री को नहीं पता।

विपक्ष का हमला

विपक्षी दलों ने इसे इतिहास के अपमान और शहीदों के बलिदान को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है। विपक्ष ने मांग की है कि मुख्यमंत्री को या तो स्पष्टीकरण देना चाहिए या माफी मांगनी चाहिए।

क्यों अहम है यह मुद्दा?

भगत सिंह केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वैचारिक नींव हैं। उनके विचार, लेख और बलिदान आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। ऐसे में उनके इतिहास को लेकर किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का गलत बयान राष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशील मुद्दा बन जाता है।

यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि क्या सत्ता में बैठे लोगों को देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास की बुनियादी समझ होनी चाहिए? अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक सफाई देती हैं या नहीं।

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