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खुल के बोल’ अभियान से झुग्गी बस्तियों की किशोरियों तक पहुंच रही माहवारी स्वच्छता की जागरूकता

Bhopal में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किशोरियों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर चलाया जा रहा “खुल के बोल” अभियान अब शहरी बस्तियों में भी प्रभाव दिखाने लगा है। मंत्रालय के पास स्थित Vallabh Nagar झुग्गी बस्ती में आयोजित विशेष जागरूकता सत्र में 70 से अधिक किशोरियों को माहवारी स्वच्छता, स्वास्थ्य प्रबंधन और सामाजिक मिथकों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का आयोजन महिला एवं बाल विकास विभाग की बाणगंगा परियोजना के अंतर्गत किया गया, जिसमें किशोरियों को खुलकर अपनी समस्याएं रखने और स्वास्थ्य संबंधी सवाल पूछने के लिए प्रेरित किया गया। अभियान का संचालन परियोजना अधिकारी अखिलेश चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

माहवारी को लेकर चुप्पी तोड़ने की पहल

“खुल के बोल” अभियान का मुख्य उद्देश्य किशोरियों के बीच माहवारी से जुड़े संकोच और भ्रांतियों को समाप्त करना है। सामाजिक स्तर पर आज भी कई क्षेत्रों में पीरियड्स को लेकर जागरूकता की कमी देखी जाती है, जिसके कारण किशोरियां स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करती हैं।

अभियान के दौरान विशेषज्ञों और स्वयंसेवकों ने किशोरियों को बताया कि माहवारी कोई बीमारी नहीं बल्कि एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है। इस दौरान स्वच्छता बनाए रखने, समय-समय पर सेनेटरी उत्पाद बदलने, साफ पानी और पोषण के महत्व पर भी चर्चा की गई।

पोस्टर और संवाद के जरिए दी गई जानकारी

कार्यक्रम में सहारा साक्षरता एज्यूकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी के स्वयंसेवकों ने आकर्षक पोस्टरों और संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से किशोरियों को जागरूक किया। स्वास्थ्य शिक्षा को आसान भाषा और व्यवहारिक उदाहरणों के जरिए समझाया गया, ताकि किशोरियां बिना झिझक अपनी बात रख सकें।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि माहवारी के दौरान साफ-सफाई की अनदेखी संक्रमण और एनीमिया जैसी समस्याओं को बढ़ा सकती है। इसलिए किशोरावस्था में स्वास्थ्य शिक्षा बेहद जरूरी है।

सेनेटरी पैड वितरण और सम्मान समारोह

सत्र के समापन पर प्रतिभागी किशोरियों को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार वितरित किए गए। साथ ही सभी उपस्थित बालिकाओं को सेनेटरी पैड उपलब्ध कराए गए, ताकि वे सुरक्षित और स्वच्छ माहवारी प्रबंधन अपना सकें।

महिला एवं बाल विकास विभाग का मानना है कि इस प्रकार के अभियान केवल स्वास्थ्य जागरूकता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह किशोरियों के आत्मविश्वास, शिक्षा और सामाजिक सहभागिता को भी मजबूत बनाने का माध्यम बन रहे हैं।

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