काशी के मणिकर्णिका घाट पर बेटी ने 75 वर्षीय माता-पिता को छोड़कर किया परित्याग, साथ था उसका पति

वाराणसी (काशी) से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जिसने समाज की संवेदनाओं और पारिवारिक मूल्यों पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। मणिकर्णिका घाट जैसे पवित्र स्थल पर एक बेटी ने अपने 75 वर्षीय बुजुर्ग माता-पिता को अकेला छोड़ दिया। हैरान करने वाली बात यह रही कि इस अमानवीय कार्य में बेटी का पति भी उसके साथ मौजूद था।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बुजुर्ग माता-पिता को घाट पर यह कहकर छोड़ा गया कि अब वे उनका पालन-पोषण नहीं कर सकते। इसके बाद महिला और उसका पति वहां से चले गए। वृद्ध दंपति घाट पर घंटों बेसहारा और रोते-बिलखते बैठे रहे। स्थानीय लोगों ने जब यह स्थिति देखी तो उन्होंने तुरंत मदद की और प्रशासन को सूचना दी।

एक समय था जब भारतीय संस्कृति में माता-पिता को भगवान का दर्जा दिया जाता था, पर आज आधुनिकता और स्वार्थ की दौड़ में वही माता-पिता कुछ लोगों के लिए बोझ बनते जा रहे हैं। सवाल यह भी उठता है कि अगर यही बुजुर्ग अपने बच्चों को बचपन में छोड़ देते, तो क्या वे आज इस दिन तक पहुँचते?

समाज में बढ़ती पारिवारिक संवेदनहीनता की यह घटना एक चेतावनी है—कि कहीं हम अपने मूल्यों और संस्कारों को खो तो नहीं रहे?

Exit mobile version