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अंकिता भंडारी मर्डर केस: सोशल एक्टिविस्ट ज्योति अधिकारी गिरफ्तार, जेल भेजी गईं

देहरादून । उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी मर्डर केस से जुड़े एक नए घटनाक्रम ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाने वाली सोशल एक्टिविस्ट ज्योति अधिकारी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। ज्योति अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने अंकिता भंडारी के समर्थन में हुए प्रदर्शन के दौरान दरांती लहराई और पहाड़ी महिलाओं का अपमान किया। इस संबंध में एक महिला सोशल एक्टिविस्ट जूही चुफाल ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई थी।

क्या है पूरा मामला

पुलिस के अनुसार अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर हुए एक सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान ज्योति अधिकारी ने कथित तौर पर उत्तेजक आचरण किया। आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शन के बीच दरांती लहराकर माहौल को हिंसक और भड़काऊ बनाने की कोशिश की। इसके साथ ही उन पर पहाड़ी महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी और अपमानजनक व्यवहार करने का भी आरोप लगाया गया है। इन घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भारी नाराजगी देखने को मिली, जिसके बाद महिला सामाजिक कार्यकर्ता जूही चुफाल ने थाने में शिकायत दर्ज कराई।

एफआईआर दर्ज होने के बाद कार्रवाई

शिकायत के आधार पर पुलिस ने ज्योति अधिकारी के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। जांच के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आंदोलन या प्रदर्शन के नाम पर हिंसा, हथियार लहराने या समाज के किसी वर्ग का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अंकिता भंडारी केस से जुड़ा है मामला

गौरतलब है कि अंकिता भंडारी मर्डर केस ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया था। इस मामले में न्याय की मांग को लेकर कई संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार प्रदर्शन किए जाते रहे हैं। इसी क्रम में हुए एक प्रदर्शन के दौरान ज्योति अधिकारी की भूमिका को लेकर विवाद खड़ा हुआ।

समाज में मिली-जुली प्रतिक्रिया

ज्योति अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोग इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरी कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि कुछ समर्थक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि पुलिस का साफ कहना है कि यह कार्रवाई कानून के दायरे में की गई है।

पुलिस का स्पष्ट संदेश

उत्तराखंड पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अंकिता भंडारी केस में न्याय की मांग पूरी तरह जायज है, लेकिन इसके नाम पर कानून हाथ में लेना, हिंसा फैलाना या महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई भविष्य में होने वाले प्रदर्शनों के लिए भी एक सख्त संदेश मानी जा रही है।

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