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खरगोन में टंट्या मामा की मूर्ति स्थापना में कथित घोटाला: 10 लाख की जगह 1 लाख की फाइबर मूर्ति लगाने का आरोप

भोपाल/खरगोन। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में आदिवासी गौरव के प्रतीक माने जाने वाले क्रांतिकारी नायक टंट्या मामा भील की प्रतिमा स्थापना को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मूर्ति निर्माण और सौंदर्यीकरण के नाम पर बड़ा घोटाला किया गया है और सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है।

आरोपों के अनुसार, प्रशासन द्वारा टंट्या मामा की ब्रॉन्ज अथवा पत्थर की मूर्ति लगाने के लिए लगभग 10 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया था, लेकिन वास्तविकता में मात्र करीब 1 लाख रुपये की फाइबर (FRP) की मूर्ति स्थापित कर दी गई। इतना ही नहीं, इस प्रतिमा का लोकार्पण भी बिना किसी सार्वजनिक सूचना के चुपचाप कर दिया गया।

40 लाख के सौंदर्यीकरण पर उठे सवाल

मामले में यह भी कहा जा रहा है कि टंट्या मामा चौक के सौंदर्यीकरण के लिए लगभग 40 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। लेकिन जब मुख्य आकर्षण यानी मूर्ति ही तय मानकों के विपरीत सस्ती और निम्न गुणवत्ता वाली लगा दी गई, तो शेष राशि के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि आदिवासी समाज के महानायक की प्रतिमा के साथ इस तरह का व्यवहार उनकी आस्था और सम्मान के साथ खिलवाड़ है। विपक्षी दलों ने इसे “सरकारी पैसों की खुली लूट” करार देते हुए पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

आदिवासी समाज की भावनाओं से खिलवाड़ का आरोप

टंट्या मामा भील को मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश का आदिवासी समाज अपना प्रेरणा स्रोत मानता है। ऐसे में उनकी प्रतिमा को लेकर हुए इस कथित भ्रष्टाचार से स्थानीय आदिवासी समुदाय में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।

आरोप लगाने वालों का कहना है कि जो सरकार स्वयं को आदिवासियों की हितैषी बताती है, वही उनके महापुरुषों के सम्मान के साथ समझौता कर रही है। यह केवल आर्थिक अनियमितता नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक अस्मिता पर भी आघात है।

जांच की मांग तेज

विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि—

मूर्ति निर्माण और स्थापना से जुड़े पूरे प्रोजेक्ट की स्वतंत्र जांच कराई जाए

टेंडर प्रक्रिया और भुगतान से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं

दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो

निर्धारित मानकों के अनुसार नई और गुणवत्तापूर्ण प्रतिमा स्थापित की जाए


प्रशासन की चुप्पी

इस पूरे मामले में अब तक जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि बढ़ते विवाद के बीच माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस प्रकरण की जांच कराई जा सकती है।

राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर घमासान तेज हो गया है। विपक्ष इसे भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बताकर सरकार पर हमलावर है, वहीं सत्तापक्ष की ओर से फिलहाल कोई ठोस सफाई नहीं दी गई है।

अब देखना यह होगा कि क्या इस मामले में पारदर्शी जांच होती है या फिर यह प्रकरण भी अन्य विवादों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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