एम्स भोपाल में 9वां सिद्ध दिवस मनाया गया, पारंपरिक चिकित्सा को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर

भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल का आयुष विभाग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आम नागरिकों के लिए सरल, सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। इसी क्रम में 6 जनवरी 2026 को एम्स भोपाल में “वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सिद्ध” थीम के साथ 9वां सिद्ध दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह दिवस सिद्ध चिकित्सा के जनक सिद्धर अगस्त्यर की जयंती के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है।

वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ आयोजन

कार्यक्रम में एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर तथा कार्यवाहक चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) विकास गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने सिद्ध चिकित्सा की वैज्ञानिकता और जनस्वास्थ्य में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।

जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखकर हुए विविध कार्यक्रम

सिद्ध दिवस के अवसर पर जनस्वास्थ्य जागरूकता को केंद्र में रखते हुए कई गतिविधियाँ आयोजित की गईं। 1 जनवरी 2026 को “वृद्धजन स्वास्थ्य के लिए सिद्ध” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। 2 जनवरी 2026 को “वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सिद्ध” विषय पर जनजागरूकता कार्यक्रम में तिरुमूलर प्राणायाम का सजीव प्रदर्शन किया गया। 5 जनवरी 2026 को रोगियों के लिए “अन्नम से अमृतम” शीर्षक से स्वस्थ पाक कला प्रतियोगिता और सिद्ध आधारित स्वास्थ्यवर्धक भोजन स्टॉल लगाए गए।

मुख्य सिद्ध दिवस समारोह और निःशुल्क शिविर

मुख्य समारोह 6 जनवरी 2026 को आयोजित हुआ, जिसमें सिद्धर अगस्त्यर पूजा, निःशुल्क सिद्ध चिकित्सा जागरूकता शिविर का उद्घाटन तथा निःशुल्क सिद्ध चिकित्सा किट का वितरण किया गया। इस अवसर पर डॉ. ऐश्वर्या ए. ने “सिद्ध चिकित्सा का परिचय” विषय पर व्याख्यान दिया। स्वस्थ पाक प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार देकर रोगियों में संतुलित आहार के प्रति जागरूकता बढ़ाई गई।

करीब 200 नागरिकों ने उठाया लाभ

राष्ट्रीय सिद्ध संस्थान, चेन्नई के सहयोग से आयोजित निःशुल्क सिद्ध चिकित्सा शिविर में लगभग 200 नागरिकों को परामर्श और औषधियाँ प्रदान की गईं। यह शिविर प्रो. माधवानन्द कर एवं प्रो. जी. सेंथिलवेल के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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