
Sidhi में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के जरिए Madhya Pradesh Congress Committee ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि पार्टी अब आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए जमीनी संगठन को फिर से सक्रिय और संरचित करने की रणनीति पर काम कर रही है।
“संगठन सृजन अभियान” के तहत आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सीधी और Singrauli जिलों के ब्लॉक अध्यक्षों, नगर अध्यक्षों और मंडलम पदाधिकारियों को बूथ स्तर की राजनीतिक तैयारी, मतदाता सूची प्रबंधन और जनसंपर्क अभियान को लेकर प्रशिक्षण दिया गया।
कांग्रेस अब “सड़क से बूथ” मॉडल पर फोकस में
मध्यप्रदेश में पिछले चुनावों के अनुभवों के बाद कांग्रेस संगठनात्मक कमजोरी को अपनी बड़ी चुनौती मान रही है। पार्टी नेतृत्व अब केवल बड़े राजनीतिक मुद्दों पर बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भारतीय चुनावों में अब केवल जनसभाएं पर्याप्त नहीं मानी जातीं। चुनावी सफलता काफी हद तक बूथ प्रबंधन, मतदाता डेटा, स्थानीय संपर्क और माइक्रो-ऑर्गनाइजेशन पर निर्भर करती है।
सीधी में आयोजित यह प्रशिक्षण उसी बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है, जहां कार्यकर्ताओं को केवल राजनीतिक भाषण नहीं बल्कि संगठन संचालन की व्यावहारिक रणनीति भी समझाई जा रही है।
किन मुद्दों पर हुआ प्रशिक्षण?
कार्यक्रम में जनहित के मुद्दों को प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचाने, गांव-स्तर पर संगठन विस्तार, मतदाता सूची की निगरानी और चुनावी तैयारी पर विशेष फोकस रखा गया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari ने कहा कि संगठन की वास्तविक ताकत बूथ स्तर के कार्यकर्ता होते हैं और पार्टी गांव-गांव तक अपनी पहुंच मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
प्रशिक्षण सत्रों में विधायक Ajay Singh, कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य Kamleshwar Patel, संगठन प्रभारी Dr. Sanjay Kamle, मतदाता सूची प्रभारी Lalit Sen, सह प्रभारी Promil Mitra और प्रवक्ता Anand Jat ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।
विंध्य क्षेत्र क्यों है राजनीतिक रूप से अहम?
सीधी और सिंगरौली दोनों जिले विंध्य क्षेत्र का हिस्सा हैं, जहां पिछले वर्षों में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा काफी तेज हुई है। भाजपा यहां मजबूत संगठनात्मक पकड़ बनाए हुए है, जबकि कांग्रेस लगातार अपने कैडर को पुनर्गठित करने की कोशिश कर रही है।
मतदाता सूची प्रबंधन पर जोर क्यों?
हाल के वर्षों में सभी प्रमुख राजनीतिक दल मतदाता सूची प्रबंधन को चुनावी रणनीति का केंद्रीय हिस्सा मानने लगे हैं। बूथ स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ता यह सुनिश्चित करते हैं कि समर्थक मतदाताओं के नाम सूची में सही तरीके से दर्ज हों और वे मतदान के दिन सक्रिय रूप से मतदान करें।
कांग्रेस की नई रणनीति: आंदोलन + संगठन
राजनीतिक जानकारों के अनुसार कांग्रेस अब दोहरी रणनीति पर काम कर रही है—एक तरफ सरकार के खिलाफ जन मुद्दों को उठाना और दूसरी तरफ लंबे समय से कमजोर पड़े संगठनात्मक ढांचे को फिर से सक्रिय करना।



