Group Sex पर क्या कहा सीमा आनंद ने? पॉडकास्ट बयान से छिड़ी सोशल मीडिया और समाज में बड़ी बहस

हाल के दिनों में चर्चित पॉडकास्ट होस्ट शुभांकर मिश्रा और सेक्स एजुकेटर सीमा आनंद के बीच हुई एक बेबाक बातचीत ने डिजिटल दुनिया में हलचल मचा दी है। बातचीत का विषय था Group Sex, जिसे लेकर सीमा आनंद के बयान पर सोशल मीडिया से लेकर सामाजिक मंचों तक तीखी बहस शुरू हो गई है। यह मामला अब केवल एक पॉडकास्ट क्लिप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अभिव्यक्ति की आज़ादी, सामाजिक मर्यादा और डिजिटल कंटेंट की जिम्मेदारी जैसे बड़े सवालों को जन्म दे रहा है।

Group Sex पर सवाल और सीमा आनंद का जवाब

पॉडकास्ट के दौरान शुभांकर मिश्रा ने सीधा सवाल किया Group Sex Good है या Bad? इसके जवाब में सीमा आनंद ने कहा कि किसी भी यौन व्यवहार को सीधे अच्छा या बुरा कहना सही नहीं है, जब तक वह आपसी सहमति (Consent) से हो। उनके अनुसार, सहमति ही किसी भी संबंध का मूल आधार है और इसके बिना कोई भी संबंध गलत है।

भारतीय समाज और परंपरा का संदर्भ

जब शुभांकर मिश्रा ने भारतीय समाज में Group Sex को गलत माने जाने की बात उठाई, तो सीमा आनंद ने भारतीय इतिहास का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कामसूत्र और खजुराहो के मंदिरों जैसे उदाहरण यह दिखाते हैं कि भारत की प्राचीन संस्कृति में यौन विषयों पर खुलापन था। उनका तर्क था कि समस्या विषय में नहीं, बल्कि हमारी सोच, झिझक और सेक्स एजुकेशन की कमी में है। समाज में यौन शिक्षा को लेकर संवाद न होने के कारण ऐसे विषय विवाद का कारण बन जाते हैं।

नैतिकता या सोच का सवाल?

बातचीत में यह भी पूछा गया कि क्या यह नैतिकता का मुद्दा है। इस पर सीमा आनंद ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई वयस्क व्यक्ति सहमति से कोई निर्णय ले रहा है, तब तक उसे नैतिकता के पैमाने पर आंकना उचित नहीं है। उनके अनुसार, यह मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जागरूक सोच से जुड़ा है।

बयान के बाद बढ़ा विवाद

सीमा आनंद के इस वक्तव्य के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।कुछ लोगों ने इसे प्रगतिशील सोच और अभिव्यक्ति की आज़ादी बताया। वहीं, कई यूज़र्स ने इसे भारतीय सामाजिक मूल्यों के खिलाफ करार दिया। बहस अब इस सवाल पर आकर टिक गई है कि क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस तरह के विषयों पर खुलकर बात करना सही है, या फिर कंटेंट क्रिएटर्स की समाज के प्रति एक विशेष जिम्मेदारी भी बनती है।

निष्कर्ष

यह विवाद Group Sex से ज़्यादा डिजिटल युग में बोलने की सीमा और जिम्मेदारी से जुड़ा है। सीमा आनंद का बयान एक वैचारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, लेकिन भारतीय समाज में इसकी स्वीकार्यता को लेकर मतभेद स्पष्ट हैं। आने वाले समय में यह बहस और गहराने की संभावना है, क्योंकि सवाल केवल एक विचार का नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और अभिव्यक्ति की आज़ादी का है।

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