पार्क में बंदर और उसके बच्चों का वीडियो वायरल, बच्चों के बचपन पर उठे सवाल

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पार्क का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक बंदर अपने तीन बच्चों के साथ बच्चों की फिसल पट्टी (स्लाइड) पर खेलता हुआ नजर आ रहा है। वीडियो में बंदर और उसके बच्चे पूरे उत्साह और मस्ती के साथ स्लाइड का आनंद लेते दिखते हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस फिसल पट्टी को बच्चों के खेलने के लिए बनाया गया है, वहां आसपास एक भी बच्चा दिखाई नहीं दे रहा। यह वीडियो सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि आज के बच्चों के बदलते बचपन और जीवनशैली पर गहरी चिंता भी जाहिर करता है।

वायरल वीडियो ने खींचा लोगों का ध्यान

वायरल हो रहे इस वीडियो में बंदर अपने बच्चों को स्लाइड से फिसलने के लिए प्रेरित करता है और खुद भी बच्चों के साथ खेलता है। यह दृश्य देखने में भले ही मजेदार हो, लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स इसे समाज के लिए एक बड़ा संकेत मान रहे हैं। लोग कमेंट कर रहे हैं कि जिन झूलों और पार्कों में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, आज वहां सन्नाटा पसरा है।

मोबाइल फोन ने छीना बचपन

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर बहस छिड़ गई है। कई यूजर्स का कहना है कि आज के बच्चे मोबाइल फोन और टैबलेट में इतने व्यस्त हो गए हैं कि उन्हें पार्क में खेलना ही याद नहीं रहा। मोबाइल गेम्स, सोशल मीडिया और ऑनलाइन वीडियो ने बच्चों को घरों तक सीमित कर दिया है। नतीजा यह है कि खेल के मैदान खाली हैं और उनका आनंद जानवर ले रहे हैं।

पढ़ाई का बढ़ता दबाव भी जिम्मेदार

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के बचपन के सिमटने का एक बड़ा कारण पढ़ाई का बढ़ता दबाव भी है। स्कूल, ट्यूशन, होमवर्क और प्रतियोगी माहौल ने बच्चों के खेलने का समय लगभग खत्म कर दिया है। माता-पिता भी अच्छे नंबरों और करियर की चिंता में बच्चों को बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित नहीं कर पा रहे।

बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर

डॉक्टरों के अनुसार, खेलकूद की कमी से बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। मोटापा, आंखों की समस्या, चिड़चिड़ापन और तनाव जैसी दिक्कतें तेजी से बढ़ रही हैं। खुले मैदान में खेलने से मिलने वाली खुशी और सामाजिक जुड़ाव अब मोबाइल स्क्रीन तक सिमट गया है।

समाज के लिए एक संदेश

यह वायरल वीडियो समाज के लिए एक आईना है। बंदर और उसके बच्चे हमें याद दिला रहे हैं कि खेल सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए जरूरी है। जरूरत है कि माता-पिता और समाज मिलकर बच्चों को मोबाइल से दूर कर पार्क और खेल के मैदानों की ओर वापस ले जाएं, ताकि उनका खोता हुआ बचपन फिर से लौट सके।

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