
65 की उम्र में फिर एक-दूजे के बने जीवनसाथी, केरल की यह प्रेम कहानी दिल छू लेगी
कहते हैं हर मोहब्बत को मंज़िल नहीं मिलती, लेकिन कुछ प्रेम कहानियाँ ऐसी होती हैं, जिन्हें वक्त भी खत्म नहीं कर पाता। हालात, जिम्मेदारियां और समाज भले ही रास्ते बदल दें, लेकिन अगर इश्क सच्चा हो तो ज़िंदगी खुद उसे पूरा करने का फैसला कर लेती है। केरल के मुण्डक्कल (Mundakkal) से सामने आई जयप्रकाश और रश्मि की प्रेम कहानी कुछ ऐसी ही है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है।
किशोरावस्था में शुरू हुआ था प्यार
जयप्रकाश (65) और रश्मि (65) एक-दूसरे को किशोरावस्था से जानते थे। दोनों के दिल में भावनाएं थीं, लेकिन उस उम्र में जयप्रकाश अपने जज़्बात शब्दों में कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। समय बीतता गया और हालात ने दोनों को अलग रास्तों पर ला खड़ा किया।रश्मि की शादी हो गई, जबकि जयप्रकाश रोज़गार की तलाश में विदेश चले गए। कुछ वर्षों बाद जयप्रकाश ने भी अपना घर बसा लिया। ज़िंदगी की जिम्मेदारियों ने दोनों को अलग-अलग दुनिया में उलझा दिया और वह अधूरी मोहब्बत यादों में दबकर रह गई।
किस्मत ने दोबारा मिलाया
सालों बाद किस्मत ने एक बार फिर करवट ली। करीब 10 साल पहले रश्मि के पति का निधन हो गया, वहीं 5 साल पहले जयप्रकाश की पत्नी का भी देहांत हो गया। अकेलेपन के इस दौर में रश्मि ने खुद को सांस्कृतिक गतिविधियों और अभिनय से जोड़ा और विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगीं। इसी दौरान जयप्रकाश ने रश्मि को एक शॉर्ट फिल्म में अभिनय करते हुए देखा। पुरानी यादें ताज़ा हो उठीं। जयप्रकाश ने हिम्मत जुटाकर रश्मि के परिवार से संपर्क किया और वहीं से फिर शुरू हुई उस अधूरी प्रेम कहानी की नई शुरुआत।
पुराना इश्क फिर हुआ ज़िंदा
मुलाकातों के साथ बीते दिनों की भावनाएं लौट आईं। जो प्यार कभी अधूरा रह गया था, वह अब समझदारी, अनुभव और अपनापन बन चुका था। दोनों ने साथ रहने का फैसला किया और इस बार हालात नहीं, बल्कि ज़िंदगी खुद उनके साथ थी। सबसे खास बात यह रही कि दोनों के बच्चों ने इस रिश्ते को पूरे दिल से स्वीकार किया। बेटी, दामाद, बहू और परिवार की मौजूदगी में कोच्चि के एक समारोह में जयप्रकाश और रश्मि विवाह बंधन में बंध गए।
सोशल मीडिया पर भावुक संदेश
इस शादी की तस्वीरों के साथ लिखा गया कैप्शन किस्मत वालों को मिलता है ऐसा प्यार तेजी से वायरल हो गया। जयप्रकाश और रश्मि की यह प्रेम कहानी साबित करती है कि अगर इश्क सच्चा हो, तो उम्र, वक्त और हालात भी उसके आगे हार मान लेते हैं। यह कहानी न सिर्फ प्यार में भरोसा जगाती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि कभी-कभी ज़िंदगी अधूरी कहानियों को पूरा करने में देर करती है, इनकार नहीं।


