मां सुरकंडा देवी मंदिर में ‘जय भीम’ के नारे, देवभूमि उत्तराखंड में मंदिरों की मर्यादा और पहचान पर उठे सवाल

टिहरी । उत्तराखंड की देवभूमि कही जाने वाली धरती पर स्थित मां सुरकंडा देवी मंदिर में ‘जय भीम’ के नारे लगाए जाने का मामला सामने आने के बाद धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक हलकों में तीखी बहस शुरू हो गई है। यह घटना केवल एक नारे तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि इसने मंदिरों की मर्यादा, आस्था की सीमाएं और भविष्य में धार्मिक स्थलों की भूमिका को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।टिहरी जनपद में स्थित मां सुरकंडा देवी मंदिर, जो शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है, वहां हाल ही में कुछ श्रद्धालुओं द्वारा ‘जय भीम’ के नारे लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। सोशल मीडिया पर इससे जुड़े वीडियो और पोस्ट वायरल होने के बाद यह विषय चर्चा के केंद्र में आ गया है। कई लोगों का कहना है कि मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर किसी भी प्रकार के राजनीतिक या वैचारिक नारे लगाना धार्मिक मर्यादा के विरुद्ध है।

स्थानीय लोगों और धार्मिक संगठनों का मानना है कि मंदिर पूजा, साधना और आध्यात्मिक शांति के स्थान होते हैं, न कि सामाजिक या राजनीतिक पहचान के प्रदर्शन के मंच। उनका कहना है कि यदि आज ‘जय भीम’ जैसे नारे मंदिरों में गूंज रहे हैं, तो भविष्य में यह परंपरा अन्य वैचारिक नारों या व्यक्ति विशेष के महिमामंडन तक भी जा सकती है।

इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या उत्तराखंड के मंदिरों में आने वाले समय में व्यक्ति विशेष की पूजा या विचारधारा आधारित गतिविधियां शुरू हो सकती हैं? कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते स्पष्ट नियम और अनुशासन लागू नहीं किए गए, तो देवभूमि की धार्मिक पहचान प्रभावित हो सकती है।

वहीं दूसरी ओर, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ‘जय भीम’ डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों और संविधान के प्रति सम्मान का प्रतीक है, न कि किसी देवी-देवता का स्थान लेने का प्रयास। उनका तर्क है कि इसे धार्मिक अतिक्रमण के रूप में देखने के बजाय सामाजिक अभिव्यक्ति के रूप में समझा जाना चाहिए।

प्रशासन और समाज की भूमिका:
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में प्रशासन और मंदिर समितियों की भूमिका अहम हो जाती है। मंदिर परिसरों में क्या स्वीकार्य है और क्या नहीं, इसे लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश होना आवश्यक है। यदि नियम सभी के लिए समान होंगे, तो अनावश्यक विवादों से बचा जा सकता है।

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