मेरठ पुलिस औकात में रहो सरकार जाएगी तुमको यहीं रहना है, आज़ाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता का वीडियो वायरल

मेरठ । उत्तर प्रदेश के मेरठ से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें खुद को आज़ाद समाज पार्टी का कार्यकर्ता बताने वाला एक व्यक्ति मेरठ पुलिस को खुलेआम धमकी देता नजर आ रहा है। वीडियो में दिए गए बयान न सिर्फ पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती माने जा रहे हैं, बल्कि यह भी सवाल खड़ा कर रहे हैं कि क्या किसी राजनीतिक दल से जुड़ा व्यक्ति कानून के रक्षकों को इस तरह धमका सकता है।
क्या है वायरल वीडियो में दावा
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कथित कार्यकर्ता कहते हुए सुनाई देता है, “मेरठ पुलिस औकात में रहो, सरकार जाएगी, तुम्हें यहीं रहना है। तुम्हारे बच्चों और परिवार के साथ क्या किया जाएगा, यह याद रखना।” वीडियो में आगे वह यह भी कहता है कि सरकार तो 2027 में चली जाएगी, लेकिन पुलिस को तो यहीं रहना है। उसके बयान में पुलिसकर्मियों और उनके परिवार को लेकर अप्रत्यक्ष धमकी का भाव साफ दिखाई देता है।
आरोपी पर दर्ज हैं कई मामले
सूत्रों के मुताबिक, उक्त व्यक्ति पर मेरठ के विभिन्न थानों में करीब 10 प्रकरण दर्ज बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन मामलों की आधिकारिक पुष्टि प्रशासन की ओर से होना अभी बाकी है। बावजूद इसके, सोशल मीडिया पर लोग इस बात को लेकर नाराजगी जता रहे हैं कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति खुलेआम पुलिस को चेतावनी कैसे दे सकता है।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं
यह वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई है। कुछ लोग इसे कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बता रहे हैं, तो कुछ यूजर्स सवाल कर रहे हैं कि क्या राजनीतिक संरक्षण के कारण ऐसे बयान दिए जा रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि यदि आम नागरिक ऐसा बयान देता, तो तत्काल कार्रवाई होती।
संविधान और कानून का सवाल
वीडियो को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या भारतीय संविधान किसी राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्ति को पुलिस को धमकाने की छूट देता है? कानूनी जानकारों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति चाहे वह किसी भी दल से जुड़ा हो कानून से ऊपर नहीं है। पुलिस को धमकी देना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर नजर
अब निगाहें मेरठ पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या वायरल वीडियो के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया जाएगा, या शिकायत का इंतजार होगा यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल यह मामला एक बार फिर यह बहस छेड़ चुका है कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून का डर, दोनों की सीमाएं क्या होनी चाहिए।




