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देशभक्त | दरभंगा राज परिवार की महारानी कामसुंदरी देवी का निधन, देशभक्ति और त्याग की विरासत हुई और समृद्ध

बिहार के गौरवशाली इतिहास में दरभंगा राज परिवार का नाम देशभक्ति, त्याग और राष्ट्रसेवा के लिए स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। इसी परंपरा की साक्षात प्रतीक रहीं महारानी कामसुंदरी देवी का सोमवार को 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने दरभंगा के कल्याणी निवास में अंतिम सांस ली। वे दरभंगा रियासत के अंतिम शासक महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी थीं और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं।

1962 के युद्ध में दरभंगा राज का ऐतिहासिक योगदान

दरभंगा राज परिवार का नाम इतिहास में विशेष रूप से 1962 के भारत–चीन युद्ध के दौरान किए गए अभूतपूर्व सहयोग के लिए दर्ज है। उस कठिन समय में जब देश को संसाधनों की अत्यंत आवश्यकता थी, दरभंगा राज परिवार ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए सरकार को लगभग 600 किलोग्राम (15 मन) सोना दान में दिया। इतना ही नहीं, राज परिवार ने अपनी तीन निजी विमान सेवाएं और लगभग 90 एकड़ भूमि भी भारत सरकार को सौंप दी। इसी भूमि पर आज दरभंगा एयरपोर्ट संचालित हो रहा है, जो आज भी राज परिवार के राष्ट्रप्रेम की गवाही देता है।

महारानी कामसुंदरी देवी: सादगी और गरिमा की प्रतिमूर्ति

महारानी कामसुंदरी देवी न केवल राजपरिवार की सदस्य थीं, बल्कि मिथिलांचल की सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना का भी अभिन्न हिस्सा रहीं। सादगीपूर्ण जीवन, धार्मिक आस्था और परंपराओं के प्रति उनकी निष्ठा के कारण वे आमजन में अत्यंत सम्मानित थीं। राजसी वैभव के बावजूद उनका जीवन संयम और मर्यादा से परिपूर्ण रहा।

पारंपरिक विधि से हुआ अंतिम संस्कार

महारानी का अंतिम संस्कार दरभंगा के कामेश्वर नगर स्थित मधेश्वरनाथ परिसर में पारंपरिक विधि-विधान के साथ किया गया। यही वह पावन स्थल है जहां सदियों से दरभंगा राज परिवार के पूर्वजों का अंतिम संस्कार होता आया है। अंतिम संस्कार में राज परिवार के सदस्य, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

मिथिलांचल में शोक की लहर

महारानी कामसुंदरी देवी के निधन से पूरे मिथिलांचल में शोक की लहर है। लोग उन्हें एक ऐसी राजमाता के रूप में याद कर रहे हैं, जिनका जीवन राष्ट्रभक्ति, संस्कृति और गरिमा का जीवंत उदाहरण था।

महारानी का जाना एक युग का अंत है, लेकिन उनका त्याग और दरभंगा राज परिवार की देशभक्ति की परंपरा आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देती रहेगी।

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